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बुधवार, 21 अप्रैल 2021

घरेलू उपचारों से ठीक करें आमवात के रोग को

 घरेलू उपचारों से ठीक करें आमवात के रोग को




जैसे अन्य अनेक रोगों को हम घरेलू उपचारों से सफलतापूर्वक दूर कर सकते हैं, इसी प्रकार आमवात के लिए भी हमारे पास अनेक उपचार है। घर में उपलब्ध फल, फूल,सब्जियों, पेड़-पौधे तथा मलाले हमें इस कार्य में मदद करते हैं। कुछ का वर्णन यहाँ कर रहे है।


गाजर का रस


गाजर सदी के मौसम में बहुतायत में मिल जाती है। यह एक सस्ता फल या सब्जी है। आमवात के रोग का अधिक प्रभाव भी सदी की तु में होता है। गाजर का रस पीने तथा गाजर खाने से आमवात का रोग शांत किया जा सकता है।


मिश्रित रस


अकेले गाजर का रस तो काफी लाभ देता ही है। यदि चुकवर, ककड़ी और गाजर, तीनों को मिलाकर, इनका रस रोगी को पिलाया जाए अथवा जो-जो सब्जी इनमें से मिले, उन्हीं का पिवित रस निकालकर रोगी को पिलाएँ, उसे रोग में आराम मिलेगा।


तुलसी की भाप


1. मुट्ठी भर तुलसी के पत्ते में । इन्हें खालकर भाप पैदा करें। यदि आमपात वाले अंगो पर यह भाप पड़ाती है तो उन्हें आराम मिलता है। तुलसी के पत्तों की भाप बड़ी ही उपयोगी रहेगी

2. यही उबला हुआ पानी भी बाद में अंगों को धोने के काम आ सकता है। इस पानी में तुलसी का असर आ चुका होता है, इसलिए प्रभावी अंगों को धोने से आराम मिलता है।


काली मिर्च, घी तथा तुलसी


आमवात के रोगी अपने इस रोग को छुटकारा पाने के लिए ।। तुलसी के पत्ते, 5 काली मिर्च साबुत तथा एक चम्मच गाय का देसी घी तें। इन तीनों को इकडा चबाने से आराम मिलता है।


अदरक और घी


आमवात अवमा गठियावाय से छुटकारा पाने के लिए दो चम्मच अदरक का रस निकालें। इसमें एक पम्मच गाय का देसी घी मिलाकर रोगी को चटाएं।


सोंठ का पानी


एक छोटा टुकड़ा सोंठ का लें। अंदाज़ से एक तोला मात्र। दो कप पानी में इस सोंठ को कूटकर डालें व उबालें। जब पानी आधा बच जाए तो उतारें। ठंडा करें। इसमें एक बड़ा चम्मच शहद मिलाकर रोगी को पिलाएँ। उसे राहत मिलेगी।


प्याज़ का रस


1. आमवात हो जाए तो कच्चा प्याज खाने की आदत बनाएँ। दोनों समय भोजन के साथ एक-एक कच्चा प्याज़ खूब चबाकर खाएँ।

2. कच्चे प्याज़ का रस तीन चम्मच एक समय रोगी को पीने को दें। ऐसी ही दो खुराक प्रतिदिन देनी चाहिए।


 लहसुन तथा तिल का तेल 


आमवात को शांत करने के लिए लहसुन को कूट-पीस लें। इसे तिल के तेल में मिलाएँ। इसका सेवन लाभकारी होता है।

मालिश आमवात का रोगी स्वयं करे तो ठीक वरना अभिभावक उसकी लहसुन के तेल से मालिश करें। काफ़ी जल्दी आराम मिलेगा।


लहसुन की खीर


लहसुन की पंद्रह कलियाँ लें। इन्हें छील लें। छोटे-छोटे टुकड़े करें। ताज़ा दूध आधा किलो लेकर उसमें इस साफ़ कटे लहसुन को डालें। उबालें। दूध को कुछ सूखने दें। यह पतली खीर तैयार हो जाएगी। लहसुन का काफी प्रभाव दूध में भी आ चुका होगा। इस खीर को खाने से रोगी लाभ उठ सकता है। इस खीर को नियमित खाने से बहुत आराम मिलेगा।


आलू उपचार


1. आलू को पीसकर पेस्ट तैयार करें। प्रभावी अंग पर इसका लेप करें। इसीसे आराम मिलेगा।

2. अपनी पैंट की जेबों में सदा एक-एक छोटा आलू रखें। यह करये आलू आमवात के रोग को नियंत्रण में रखेंगे।

3. आमवात का रोगी अपने भोजन में आलू को सम्मिलित करें। बल्कि दिन में एक-दो बार केवल आलू ही खाया करें।

4. एक टुकड़ा कच्चे आलू का लें। इसे पीस लें। अब इस पिसे आलू का अँगूठे पर लेप करें। इसी से आराम मिलना शुरू हो जाएगा।


मेथी से उपचार


गठियाबाय से बचने के लिए, आराम पाने के लिए मेथी से उपचार संभव है। जैसे


1. रात के समय एक गिलास पानी मे दानेदार मेथी के दो बड़े चम्मच भिगो दें। सुबह इस मेवी भीगे पानी को मामूली गरम करें। छानें। इसे पी लें।

2. यदि आप अंकुरित मेवी खाना शुरू करें तो इससे आमवात को बड़ा शीघ्र आराम मिलता है। जो ऊपर नं. । श उपचार है, उसे प्रातः छानकर मेथी अलग करें। केवल पानी को मामूली गरम कर रोगी पी ले। उनी, भीगी मेथी को अंकुरित करने को रखें। अगले दिन अंकुरित मेवी खाकर रोग नगा सकते हैं।

3. हरी मेथी की भुजिया, साग, सब्जी बनाकर कुछ दिन नियमित खाएँ। इससे बड़ा आराम मिलता है।

4. हरी मेथी को बारीक काटकर, कच्ची चवाकर भी खा सकते हैं। यह भी अपना असर दिखाती है।

5. मेथी को देशी घी में भून लें। ठंडा हो जाने पर पीस लें। इसमें गुड़ डालकर, इसके लड्डू बनाएँ। ये लड्डू दिन में दो बार, एक-एक लाना है। यह काफ़ी जल्दी प्रभाय करने वाला इलाज है।


शहद का सेवन


आमवात का रोगी यदि दो चम्मच शहद नियमित खाता रहे तो उसे यह रोग छोड़ जाएगा।वैसे भी यदि किसी को इस रोग के होने की संभावना मात्र लगे तो वह आराम से न बैठे। उसे शहद के दो या तीन चमच रोज़ खाने चाहिए। उसको काफी फायदा होगा। इस तरह हमने जान लिया है कि गठियावाच या आमवात का रोग कुछ घरेलू उपचारों से अवश्य ठीक किया जा सकता है। हर व्यक्ति को ज़रूरत पड़ने पर इन उपचारों को अपनाना चाहिए।


धन्यावद Gk Ayurved