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रविवार, 18 अप्रैल 2021

जल जाने पर प्रयोग में लाएँ घरेलू विधियाँ

 जल जाने पर प्रयोग में लाएँ घरेलू विधियाँ


शरीर के किसी भी अंग का आग से जल जाना बहुत ही दुखदायी होता है। यदि एकाच अंग जले तब तो सहन हो भी सकता है। यदि कपड़ों को आग लग आने के कारण पूरा शरीर ही आग की चपट में आ जाए तब जो पीड़ा झेलनी पड़ती है, तब यह जो दुखदायी बन जाती है, उसका तो वर्णन करना भी कठिन है।




यदि अचानक आग लग ही जाए तो इन कुछ बातों की ओर ध्यान दें। सावधानियों बरतें। इनसे कष्ट को काफी कम किया जा सकता है। स्थिति पर काबू पाया जा सकता है।


सावधानियों

1. आग लगने पर वह आदमी बाहर न भागे। जितना हवा में जाएगा, उतनी आग भड़केगी।

2. वह अकेला हो या साथ में कोई और भी, उसे भारी कपड़े, कंबल, रजाई आदि में लपेट लेना चाहिए। इससे आग बुझ जाएगी।

3. कंचत, रजाई आदि तपेटकर वह व्यक्ति जमीन पर लेट जाए। इससे जाग जल्दी बुझेगी। उसके कंवत या रजाई से हया अंबर बिजुत प्रवेश न करे।

4. ऐसे व्यक्ति पर पानी मत डालें। पानी का प्रयोग करने से शरीर पर फफोले उभर आएंगे-जो बहुत ही पीड़ापक होते हैं।

5. शरीर के जले अंग पर कपणे आलू को पीसकर लगाएं। इससे दर्द वटता है। शांति मिलती है।

6. यदि जल जाने के कारण घाव हो गए हों तो इन घावों का उपचार करें। ये जल्दी-से-जल्दी ठीक हो। इसके लिए नारियल के तेल को चूने के पानी में मिलाकर, घावों पर लगाएं। जितना चूने का पानी सें, उतना ही नारियल का तेल । दोनों को मिलाकर लगाने से धीरे-धीरे घाव भरने लगते हैं।

7. चूने का पानी नारियल के तेल की काय अलसी के तेल में भी मिलाकर लगा सकते हैं। दोनों तेलों में से जो नज़दीक उपलब्ध रहे, उसी का लाभ


गेहूँ का आटा


जाने का उपचार करने के लिए घरेलू उपचार करें। गेहूँ का आटा पानी के साथ गीला करें। इस गीले आटे को जले हुए अंग पर लगाएँ। इससे बड़ी शांति मिलेगी। यह आटा जले की जलन को खींच लेगा।


पिसा हुआ केला


यदि कोई अंग आग में जल जाए तो ताज़ा केता लेकर पीस लें। लुग्दी-सी बनाएँ। इस पिसे केले का जले अंग पर लेप करें। बहुत ही आराम मिलेगा। केला ठंडक पैदा कर, घाव ठीक करेगा।


जले हुए जौ 


शरीर का कोई भी अंग जल जाए तो जौ ले । इन्हें जलाएं। पीसें । छाने । पाउडर-सी राख तैयार हो जाएगी। इस राख को तिल के तेल में मिलाएँ । लुग्दी-सी तेयार कर, जले अंग पर लगाएं। काफी राहत मिलेगी। 


धूप से जली त्वचा


1. यदि त्वचा धूप के कारण झुलसी हो या आग के कारण हो, कच्चा आलू लेकर, कूट-पीसकर लगाएं। जले अंग पर मलें। बाँथे। कोई आधा घंटा बाद बोल दें। ऐसा दिन में चार बार करें।


कच्चे आलू का रस


त्वचा के आग से जलने या यूप में शुललने के कारण परेशान मत हो। कच्चे आलू का रस निकालें। इत्ते त्वचा पर लगाएँ। आराम मिलेगा। धीरे-धीरे मुरासा अंग सुंदर निखर आएगा।


पानी में पिसी मूंग


शरीर के जले अंगों को राहत देने के लिए साबुत मूंग सें। इन्हें पानी में पीसें। इस पेस्ट का जले अंग पर लेप करें। काफी आराम मिलता है।


नारियल व तुलसी


जाले अंग का दर्द हटाने के लिए तथा इसे ठीक करने के लिए तुलसी का रस दो चम्मच निकालें। इतना ही नारियल का तेल से। दोनों को तुरंत मिलाकर, जले अंग पर लगाएं। इससे काफी आराम मिलेगा।


नमक का घोल


जले अंग पर छाले न पड़े, इसके लिए नमक का गाना मोल तैयार करें। इसे छालों पर लगाएं। काफ़ी राहत मिलेगी। वदं तो कम होगा ही, छाले भी नहीं पड़ेंगे।


ग्वारपाठा (एलोवेरा) का गूदा


फासोले न पड़ें। छाले न बनें। इसके लिए ग्वारपाठा का गूदा लें। अच्छी प्रकार पीसें।जले अंग पर लगाएं। बहुत राहत मिलेगी।


घी का प्रयोग


जैसे ही कोई व्यक्ति अपना कोई अंग आग से जला बैठे, वह इस पर घी लगाता रहे। आराम पाएगा।


पिसा हुआ प्याज


कन्या प्यार लेकर, छीलकर, पीसकर जले हुए अंग पर लगाएँ । राहत पाएँगे। ऐसा बार-बार करें। छाते तो पड़ेंगे ही नहीं, बनता घाव भी ठीक हो जाएगा।


सरसों का तेल भी


यदि जले हुए अंग पर ओर कुछ भी लगाने को न मिले तो घर में सदा उपतपय रहने वाला सरसों का तेल बार-बार लगाते रहें। आराम पाएंगे।


पिसी, कच्ची गाजर


कच्ची गाजर को पीस लें। इसको जले हुए अंगों पर लगाएं। यह बहुत आराम देगी।


पिसी मेथी


जले अंग का उपचार करने के लिए दानेदार मेथी अंदाज से तें। इसे पानी में पीसें। मात्रा इतनी हो जाए कि जले अंग पर लेप हो सके। यह जलन को हटाएगी। छाले आदि नहीं होंने देगी।


शहद का प्रयोग


शरीर का कोई भी अंग जला हो, उस पर शहद लगाने से बड़ा आराम मिलता है। जलन घटती है, दाह नहीं रहती। फफोले नहीं होने पाते। यहाँ तक कि घाव हो जाने पर भी यह ठीक हो सकता है। जब तक पूरी तरह ठीक न हो जाए, शहद लगाते रहें।


सफेद दाग


यदि इलाज कोई भी किया हो, जले स्थान पर ठीक हो जाने के बाद सफ़ेद दाग रह जाएँ तो भी शहद लगातार लगाएँ। ये सफ़ेद दाग भी नहीं रहेंगे।

अब तक हम जले के घरेलू उपचारों की एक लम्बी लिस्ट जान गए हैं। मौके पर जो भी उपचार आसानी से मिले, उसी को प्रयोग में लाना चाहिए।


धन्यवाद् Gk Ayurved


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