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बुधवार, 21 अप्रैल 2021

घरेलू उपचारों से ठीक करें आमवात के रोग को

 घरेलू उपचारों से ठीक करें आमवात के रोग को




जैसे अन्य अनेक रोगों को हम घरेलू उपचारों से सफलतापूर्वक दूर कर सकते हैं, इसी प्रकार आमवात के लिए भी हमारे पास अनेक उपचार है। घर में उपलब्ध फल, फूल,सब्जियों, पेड़-पौधे तथा मलाले हमें इस कार्य में मदद करते हैं। कुछ का वर्णन यहाँ कर रहे है।


गाजर का रस


गाजर सदी के मौसम में बहुतायत में मिल जाती है। यह एक सस्ता फल या सब्जी है। आमवात के रोग का अधिक प्रभाव भी सदी की तु में होता है। गाजर का रस पीने तथा गाजर खाने से आमवात का रोग शांत किया जा सकता है।


मिश्रित रस


अकेले गाजर का रस तो काफी लाभ देता ही है। यदि चुकवर, ककड़ी और गाजर, तीनों को मिलाकर, इनका रस रोगी को पिलाया जाए अथवा जो-जो सब्जी इनमें से मिले, उन्हीं का पिवित रस निकालकर रोगी को पिलाएँ, उसे रोग में आराम मिलेगा।


तुलसी की भाप


1. मुट्ठी भर तुलसी के पत्ते में । इन्हें खालकर भाप पैदा करें। यदि आमपात वाले अंगो पर यह भाप पड़ाती है तो उन्हें आराम मिलता है। तुलसी के पत्तों की भाप बड़ी ही उपयोगी रहेगी

2. यही उबला हुआ पानी भी बाद में अंगों को धोने के काम आ सकता है। इस पानी में तुलसी का असर आ चुका होता है, इसलिए प्रभावी अंगों को धोने से आराम मिलता है।


काली मिर्च, घी तथा तुलसी


आमवात के रोगी अपने इस रोग को छुटकारा पाने के लिए ।। तुलसी के पत्ते, 5 काली मिर्च साबुत तथा एक चम्मच गाय का देसी घी तें। इन तीनों को इकडा चबाने से आराम मिलता है।


अदरक और घी


आमवात अवमा गठियावाय से छुटकारा पाने के लिए दो चम्मच अदरक का रस निकालें। इसमें एक पम्मच गाय का देसी घी मिलाकर रोगी को चटाएं।


सोंठ का पानी


एक छोटा टुकड़ा सोंठ का लें। अंदाज़ से एक तोला मात्र। दो कप पानी में इस सोंठ को कूटकर डालें व उबालें। जब पानी आधा बच जाए तो उतारें। ठंडा करें। इसमें एक बड़ा चम्मच शहद मिलाकर रोगी को पिलाएँ। उसे राहत मिलेगी।


प्याज़ का रस


1. आमवात हो जाए तो कच्चा प्याज खाने की आदत बनाएँ। दोनों समय भोजन के साथ एक-एक कच्चा प्याज़ खूब चबाकर खाएँ।

2. कच्चे प्याज़ का रस तीन चम्मच एक समय रोगी को पीने को दें। ऐसी ही दो खुराक प्रतिदिन देनी चाहिए।


 लहसुन तथा तिल का तेल 


आमवात को शांत करने के लिए लहसुन को कूट-पीस लें। इसे तिल के तेल में मिलाएँ। इसका सेवन लाभकारी होता है।

मालिश आमवात का रोगी स्वयं करे तो ठीक वरना अभिभावक उसकी लहसुन के तेल से मालिश करें। काफ़ी जल्दी आराम मिलेगा।


लहसुन की खीर


लहसुन की पंद्रह कलियाँ लें। इन्हें छील लें। छोटे-छोटे टुकड़े करें। ताज़ा दूध आधा किलो लेकर उसमें इस साफ़ कटे लहसुन को डालें। उबालें। दूध को कुछ सूखने दें। यह पतली खीर तैयार हो जाएगी। लहसुन का काफी प्रभाव दूध में भी आ चुका होगा। इस खीर को खाने से रोगी लाभ उठ सकता है। इस खीर को नियमित खाने से बहुत आराम मिलेगा।


आलू उपचार


1. आलू को पीसकर पेस्ट तैयार करें। प्रभावी अंग पर इसका लेप करें। इसीसे आराम मिलेगा।

2. अपनी पैंट की जेबों में सदा एक-एक छोटा आलू रखें। यह करये आलू आमवात के रोग को नियंत्रण में रखेंगे।

3. आमवात का रोगी अपने भोजन में आलू को सम्मिलित करें। बल्कि दिन में एक-दो बार केवल आलू ही खाया करें।

4. एक टुकड़ा कच्चे आलू का लें। इसे पीस लें। अब इस पिसे आलू का अँगूठे पर लेप करें। इसी से आराम मिलना शुरू हो जाएगा।


मेथी से उपचार


गठियाबाय से बचने के लिए, आराम पाने के लिए मेथी से उपचार संभव है। जैसे


1. रात के समय एक गिलास पानी मे दानेदार मेथी के दो बड़े चम्मच भिगो दें। सुबह इस मेवी भीगे पानी को मामूली गरम करें। छानें। इसे पी लें।

2. यदि आप अंकुरित मेवी खाना शुरू करें तो इससे आमवात को बड़ा शीघ्र आराम मिलता है। जो ऊपर नं. । श उपचार है, उसे प्रातः छानकर मेथी अलग करें। केवल पानी को मामूली गरम कर रोगी पी ले। उनी, भीगी मेथी को अंकुरित करने को रखें। अगले दिन अंकुरित मेवी खाकर रोग नगा सकते हैं।

3. हरी मेथी की भुजिया, साग, सब्जी बनाकर कुछ दिन नियमित खाएँ। इससे बड़ा आराम मिलता है।

4. हरी मेथी को बारीक काटकर, कच्ची चवाकर भी खा सकते हैं। यह भी अपना असर दिखाती है।

5. मेथी को देशी घी में भून लें। ठंडा हो जाने पर पीस लें। इसमें गुड़ डालकर, इसके लड्डू बनाएँ। ये लड्डू दिन में दो बार, एक-एक लाना है। यह काफ़ी जल्दी प्रभाय करने वाला इलाज है।


शहद का सेवन


आमवात का रोगी यदि दो चम्मच शहद नियमित खाता रहे तो उसे यह रोग छोड़ जाएगा।वैसे भी यदि किसी को इस रोग के होने की संभावना मात्र लगे तो वह आराम से न बैठे। उसे शहद के दो या तीन चमच रोज़ खाने चाहिए। उसको काफी फायदा होगा। इस तरह हमने जान लिया है कि गठियावाच या आमवात का रोग कुछ घरेलू उपचारों से अवश्य ठीक किया जा सकता है। हर व्यक्ति को ज़रूरत पड़ने पर इन उपचारों को अपनाना चाहिए।


धन्यावद Gk Ayurved


सोमवार, 19 अप्रैल 2021

लू लगने' तथा 'चक्कर आने' पर स्वयं करें उपचार

 'लू लगने' तथा 'चक्कर आने' पर स्वयं करें उपचार

लू लगना



गर्मी के मौसम में ही लू का प्रकोप रहता है। जिनका शरीर नाजुक होता है तथा उन्हें धूप में, भरी दोपहरी में जाना पड़ता है, उन्हें तू घेर लेती है। इससे बेहद बेचैनी रहती है। कभी-कभी चक्कर आ जाते हैं। कोई बच्चा, बड़ा या पुवती चक्कर खाकर सड़क पर ही गिर जाता है। वेसुध हो जाता है तो कोई घर या ठिकाने पर पहुँचकर बेसुध हो जाता है। लू लगने के आसार ही न बनने दें। यदि लू लग भी जाए तो इसका घरेलू इलाज संभव है। आसानी से हो सकता है। थोड़ी-सी कोशिश कर आप लू के रोगी को ठीक कर सकते हैं।


नींबू-पानी


यदि लू लग जाए तो पानी का एक गिलास लें। इसमें नींबू निचोड़ें। इसमें दो चम्मच

पिसी मिश्री भी लें। इसे मिलाकर रोगी को पिलाएँ। यदि फ्रिज या घड़े का ठंडा पानी हो तो और भी जल्दी आराम मिलेगा। वर्क का प्रयोग न करें तो अच्छा।


पानी से स्पंज तथा पानी सेवन


1. लू लगा व्यक्ति यदि सामान्य पानी बार-बार पीता रहे तो लू का प्रभाव कम

होगा।

2. यदि लू का प्रभाव बहुत अधिक हो तो रोगी को ताजा पानी के साथ दो-तीन

बार स्पंज करें। उसे बहुत आराम मिलेगा।


धनिया का पानी


गर्मी के दिनों में लू लगने की संभावना बनी रहती है। अतः बचाव में ही बचाव है, का विचार मन में रखते हुए धनिया को पानी में भिगोते रहें। कुछ घंटों बाद इसे मथकर,पानी छानकर, भीव शक्कर, चीनी, मित्री, कुछ भी मिलाकर पिला दें। दिन में दो बार इस यराक को लेते रहे। लू न लगे इसलिए तो इसे पीना ही है, लू लग जाए तो भी इसे पी सकते हैं।


इमली का पानी


गर्मी लग जाए, तू का प्रकोप हो जाए, ऐसे में इमली को घंटा-भर भिगोएं। फिर इसे

अच्छी प्रकार मलें। इसका असर पानी में आ जाए। इसे छानकर, कुछ और पानी डालकर रोगी को पिलाएँ। आराम पाएगा।


इमली का गूदा


इमली के गूदे को पाँव तथा हाथों के तलयों पर मलने से गर्मी निकल जाती है। तू का प्रभाव खत्म हो जाता है। यह सस्ता तया आसान तरीश है।


तुलसी के पत्तों का रस


तुलसी के पत्तों का रस निकालें । इसे पानी में मिलाएं। मियी या चीनी स्वादानुसार मिलाएँ। इसे पीने से तू का प्रभाव खत्म होता है। यदि चक्कर आते हो तो, तुलसी का रस ब्ड़ा लाभकारी है।


शहतूत का सेवन


लू, गर्मी का प्रभाव ख़त्म होने के लिए शहतूत को धोकर सेवन करें। यदि शहतूत का रस मिल सके तो एक कप रस, एक कप पानी डालकर पी लें। बड़ा आराम मिलेगा।


प्याज़ का सेवन


1. लू लगी होने पर, गर्मी से बचने के लिए प्याग को अपने खाने में सम्मिलित

करें। भोजन के साथ कच्चा प्याज साना शुरू करें।

2. एक कच्चा प्याज, नमक, नींबू का रस डालकर नियमित अलग से खाएँ। भोजन

के साथ प्याज खाने से अलग ही।

3. एक कच्या डोटा प्याज़ छीलकर जेब में रखें जब जाएं गर्मी में। काफी आराम मिलेगा 


प्याज़ का रस


1. प्याज का रस आधा कप निकालकर पीने से आराम मिलता है। गर्मी तथा

लू का प्रभाव बीक होता है।

2. प्याज का रस निकालकर छाती पर मलें। कनपटिनों पर मलें। इससे तू का

प्रभाव खत्म होता है।


लू सगने पर


यदि किसी को लू लग जाए तो उसे निम्नलिखित सभी या कुछ क्षण परेशान करेंगे 1. मुंह सूखेगा। अधिक प्यास लगेगी। ज़बान सूखी रहेगी।

2. चक्कर आने लगेंगे।

3. दित पवराएगा। पबराहट लगेगी। बेआरामी लगेगी।

4. पसीना आने लगेगा। माथे पर, होली पर, पाँव के तलवों पर...सब ओर पसीना

आने लगेगा।

5. रोगी हर प्रकार से असहज महसूस करेगा।


इन सब का उपचार

1. ऐसे रोगी को कैरी की छाछ पिलाने से उसे बहुत जल्दी लाभ होगा।

2. कैरी की छाक बनाने का तरीका

बड़ी करी-एक अदद लें।

इस कैरी को उबालें।

चाहें तो बैंगन की तरह इसे सेंके। जैसे बैंगन का मुर्ता बनाने के लिए

सेंकना पड़ता है, वैसे ही सेंकें।

इसे कुछ देर ठंडे पानी में रखें। केरी उचाली हो या सेंकी गई। आधा-पीना

घंटा ठंडे पानी में ज़रूर रखें।

ठंडे पानी से निकालकर इसके छिलके उतारें।

अब छिली हुई कैरी को भली प्रकार मथ लें।

इसके मधे हुए गूदे में डालें-(i) गुड़, (ii) धनिया, (ii) नमक,

(iv) जीरा, (v) काली मिर्च पिसी हुई।

वह सब डालने के बाद फिर से मः।

इसमें पानी डालकर घोल लें। यही कैरी की लस्सी है।

दिन में तीन बार, 4-1 घंटों बाद, एक-एक कप इस कैरी की लस्सी

को रोगी को पिलाएँ। उस पर से गर्मी तथा लू का पूरा प्रभाव उतर जायगा


चक्कर आना

हमें चक्कर किसी भी कारण से आ सकते हैं। यह गर्मी के कारण, लू लग जाने के कारण या कमज़ोरी होने के कारण भी आ सकते हैं। कभी घबराहट होना, दिल घबराना भी इसका कारण बन सकता है। किसी सबै रोग से उठने के कारण, दवाइयों के अधिक सेवन के कारण, अचानक भय की स्थिति हो जाने के कारण भी यक्कर आ सकते हैं। इन चक्करों को रोकने, चक्कर आ जाने पर उभरने, चक्कर के प्रभाव को खत्म करने के लिए घरेलू उपचारों पर निर्भर होना बहुत ही संभव है। रोग से छुटकारा पाने के कुछ साधन, कुछ उपचार यहाँ दिए जा रहे हैं।


आँवले का शर्बत्

गर्मियों में चक्कर आ जाना आम बात है। जरूरी नहीं कि कमजोर व्यक्ति ही हो, लू

व गर्मी का प्रभाव किसी को भी हो सकता है। आंवले का शर्यत इस तकलीफ से छुटकारा दिलाता है। इसका पान करना चाहिए। यह गर्मी के कारण होने वाली घबराहट को भी खम करता है।


धनिया का ताज़ा शर्बत

जब कभी सिर में चक्कर आते हो वा ऐसी संभावना भी बने तो धनिया का सहारा लें। धनिया तीन चम्मच, पानी एक गिलास, दोनों को अच्छी तरह उबालें। नीचे उतारें। इसमें स्वादानुसा रशक्कर या मिश्री मिलाएँ। ठंडा होने पर रोगी को पिलाएँ। आराम मिलेगा।


धनिया व शक्कर


चक्कर आने की प्रवृत्ति बन जाए तो एक चम्मच धनिया तवा इतनी ही शक्कर लेकर, इक़ट्ठी चवाएँ। इससे दिल को ताकत मिलेगी। चक्कर नहीं आया करेंगे।


मुनक्का तथा सेंधा नमक


चक्कर आने की दशा में या ऐसी प्रवृत्ति बन जाने पर, अधिक घबराएँ नहीं। बल्कि पांच दाने मुनक्का की से। बीज निकालें। इसे पहले घी में थोड़ा सेंक लें, फिर बीज निकाले। सेंधा नमक डालकर इसे रोगी को खिलाएँ। चक्कर नहीं 


तुलसी का रस


चक्कर छोटों को आ रहे हो या बड़ों को, चक्कर महिलाओं को आ रहे हों या पुरुषों

को, सबके लिए तुलसी का रस बड़ा लाभकारी रहता है। तुलसी के ताज़ा पने से। इन्हें घोएँ। इनका रस निकारों। 31 पते तक ले सकते हैं। अब इसके रस में आवश्यकतानुसार

मिश्री मिलाएँ। बच्चों को तो एक से डेढ़ चम्मच से शुरू होकर बड़ों को आधा कप तक ऐसा रस पिलाया जा सकता है। यह चक्कर लाने की प्रवृत्ति को समाप्त कर देता है।


काली मिर्च से बना हलुवा


यदि किसी को अक्सर चक्कर आने की शिकायत रहती हो तो इसके लिए हलुवा तैयार करें। इसके लिए काली मिर्च ।। दाने मोटी-मोटी कूट लें। इसे पीसना नहीं। फूटना ही है। इसे दस चम्मच देशी घी में तलें। मिर्च और धी को जानकर अलग करें। इस घीमें आटा भूनकर हनुषा बनाएँ। आवश्यकतानुसार शक्कर डाले। फिर तली हुई काली मिर्च । का चूरा इस हलुवा में मिलाकर रखें। आधा प्रातः आधा शाम दोनों समय के भोजन के बाद रोगी खा ले। कुछ दिनों तक इस उपचार को जारी रखें। चक्कर आने वाली बात खत्म होगी। पूरी तरह आराम मिलेगा।

हम जान गए हैं कि लू लगने तथा चक्कर आने की समस्या को हम घरेलू उपचारों

से कैसे नियंत्रण में रख आराम पा सकते हैं। ये सभी आसान भी हैं। लाभ उठाएं।


धन्यवाद  Gk Ayurved




रविवार, 18 अप्रैल 2021

जल जाने पर प्रयोग में लाएँ घरेलू विधियाँ

 जल जाने पर प्रयोग में लाएँ घरेलू विधियाँ


शरीर के किसी भी अंग का आग से जल जाना बहुत ही दुखदायी होता है। यदि एकाच अंग जले तब तो सहन हो भी सकता है। यदि कपड़ों को आग लग आने के कारण पूरा शरीर ही आग की चपट में आ जाए तब जो पीड़ा झेलनी पड़ती है, तब यह जो दुखदायी बन जाती है, उसका तो वर्णन करना भी कठिन है।




यदि अचानक आग लग ही जाए तो इन कुछ बातों की ओर ध्यान दें। सावधानियों बरतें। इनसे कष्ट को काफी कम किया जा सकता है। स्थिति पर काबू पाया जा सकता है।


सावधानियों

1. आग लगने पर वह आदमी बाहर न भागे। जितना हवा में जाएगा, उतनी आग भड़केगी।

2. वह अकेला हो या साथ में कोई और भी, उसे भारी कपड़े, कंबल, रजाई आदि में लपेट लेना चाहिए। इससे आग बुझ जाएगी।

3. कंचत, रजाई आदि तपेटकर वह व्यक्ति जमीन पर लेट जाए। इससे जाग जल्दी बुझेगी। उसके कंवत या रजाई से हया अंबर बिजुत प्रवेश न करे।

4. ऐसे व्यक्ति पर पानी मत डालें। पानी का प्रयोग करने से शरीर पर फफोले उभर आएंगे-जो बहुत ही पीड़ापक होते हैं।

5. शरीर के जले अंग पर कपणे आलू को पीसकर लगाएं। इससे दर्द वटता है। शांति मिलती है।

6. यदि जल जाने के कारण घाव हो गए हों तो इन घावों का उपचार करें। ये जल्दी-से-जल्दी ठीक हो। इसके लिए नारियल के तेल को चूने के पानी में मिलाकर, घावों पर लगाएं। जितना चूने का पानी सें, उतना ही नारियल का तेल । दोनों को मिलाकर लगाने से धीरे-धीरे घाव भरने लगते हैं।

7. चूने का पानी नारियल के तेल की काय अलसी के तेल में भी मिलाकर लगा सकते हैं। दोनों तेलों में से जो नज़दीक उपलब्ध रहे, उसी का लाभ


गेहूँ का आटा


जाने का उपचार करने के लिए घरेलू उपचार करें। गेहूँ का आटा पानी के साथ गीला करें। इस गीले आटे को जले हुए अंग पर लगाएँ। इससे बड़ी शांति मिलेगी। यह आटा जले की जलन को खींच लेगा।


पिसा हुआ केला


यदि कोई अंग आग में जल जाए तो ताज़ा केता लेकर पीस लें। लुग्दी-सी बनाएँ। इस पिसे केले का जले अंग पर लेप करें। बहुत ही आराम मिलेगा। केला ठंडक पैदा कर, घाव ठीक करेगा।


जले हुए जौ 


शरीर का कोई भी अंग जल जाए तो जौ ले । इन्हें जलाएं। पीसें । छाने । पाउडर-सी राख तैयार हो जाएगी। इस राख को तिल के तेल में मिलाएँ । लुग्दी-सी तेयार कर, जले अंग पर लगाएं। काफी राहत मिलेगी। 


धूप से जली त्वचा


1. यदि त्वचा धूप के कारण झुलसी हो या आग के कारण हो, कच्चा आलू लेकर, कूट-पीसकर लगाएं। जले अंग पर मलें। बाँथे। कोई आधा घंटा बाद बोल दें। ऐसा दिन में चार बार करें।


कच्चे आलू का रस


त्वचा के आग से जलने या यूप में शुललने के कारण परेशान मत हो। कच्चे आलू का रस निकालें। इत्ते त्वचा पर लगाएँ। आराम मिलेगा। धीरे-धीरे मुरासा अंग सुंदर निखर आएगा।


पानी में पिसी मूंग


शरीर के जले अंगों को राहत देने के लिए साबुत मूंग सें। इन्हें पानी में पीसें। इस पेस्ट का जले अंग पर लेप करें। काफी आराम मिलता है।


नारियल व तुलसी


जाले अंग का दर्द हटाने के लिए तथा इसे ठीक करने के लिए तुलसी का रस दो चम्मच निकालें। इतना ही नारियल का तेल से। दोनों को तुरंत मिलाकर, जले अंग पर लगाएं। इससे काफी आराम मिलेगा।


नमक का घोल


जले अंग पर छाले न पड़े, इसके लिए नमक का गाना मोल तैयार करें। इसे छालों पर लगाएं। काफ़ी राहत मिलेगी। वदं तो कम होगा ही, छाले भी नहीं पड़ेंगे।


ग्वारपाठा (एलोवेरा) का गूदा


फासोले न पड़ें। छाले न बनें। इसके लिए ग्वारपाठा का गूदा लें। अच्छी प्रकार पीसें।जले अंग पर लगाएं। बहुत राहत मिलेगी।


घी का प्रयोग


जैसे ही कोई व्यक्ति अपना कोई अंग आग से जला बैठे, वह इस पर घी लगाता रहे। आराम पाएगा।


पिसा हुआ प्याज


कन्या प्यार लेकर, छीलकर, पीसकर जले हुए अंग पर लगाएँ । राहत पाएँगे। ऐसा बार-बार करें। छाते तो पड़ेंगे ही नहीं, बनता घाव भी ठीक हो जाएगा।


सरसों का तेल भी


यदि जले हुए अंग पर ओर कुछ भी लगाने को न मिले तो घर में सदा उपतपय रहने वाला सरसों का तेल बार-बार लगाते रहें। आराम पाएंगे।


पिसी, कच्ची गाजर


कच्ची गाजर को पीस लें। इसको जले हुए अंगों पर लगाएं। यह बहुत आराम देगी।


पिसी मेथी


जले अंग का उपचार करने के लिए दानेदार मेथी अंदाज से तें। इसे पानी में पीसें। मात्रा इतनी हो जाए कि जले अंग पर लेप हो सके। यह जलन को हटाएगी। छाले आदि नहीं होंने देगी।


शहद का प्रयोग


शरीर का कोई भी अंग जला हो, उस पर शहद लगाने से बड़ा आराम मिलता है। जलन घटती है, दाह नहीं रहती। फफोले नहीं होने पाते। यहाँ तक कि घाव हो जाने पर भी यह ठीक हो सकता है। जब तक पूरी तरह ठीक न हो जाए, शहद लगाते रहें।


सफेद दाग


यदि इलाज कोई भी किया हो, जले स्थान पर ठीक हो जाने के बाद सफ़ेद दाग रह जाएँ तो भी शहद लगातार लगाएँ। ये सफ़ेद दाग भी नहीं रहेंगे।

अब तक हम जले के घरेलू उपचारों की एक लम्बी लिस्ट जान गए हैं। मौके पर जो भी उपचार आसानी से मिले, उसी को प्रयोग में लाना चाहिए।


धन्यवाद् Gk Ayurved


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शनिवार, 17 अप्रैल 2021

वमन, अम्लता तथा जलोदर के प्राकृतिक उपचार जाने

 वमन, अम्लता तथा जलोदर के प्राकृतिक उपचार जाने

वमन का उपचार

वमन यानि उल्टी आना देखने में कितना साधारण रोग लगता है। मगर जब यह बढ़ जाए तो परेशानी कर सकता है। अपच के कारण उल्टी, कोई बात नहीं। गर्भ ठहरनेका संकेत मान उल्टी, कोई बात नहीं। मगर जब इनकी तीव्रता बढ़ जाए। जब उल्टीके साथ खून भी आने लगे। या जब गर्भवती स्त्री को बेहद उल्टियाँ आने लगे। इन सब परेशानियों में बड़ी कठिनाई होती है। बात नियंत्रण से बाहर भी हो सकती है। 



यहाँ हम कुछ अच्छे व आसान घरेलू उपचारों की चर्चा करते हैं।

इमली का रस

कोई 50 ग्राम इमली लें। इसे भिगोकर रखें। कुछ देर बाद इसको अच्छी तरह मय लें। छान कर रस निकालें। इसे एक गिलास पानी में मिलाकर रोगी को पिला दें। उल्टी आना रुक जाएगा।

लॉग का काढ़ा

लौंग पाँच अदद लें। कूटें। डेढ़ कप पानी लेकर इसे खूब उबालें। छानें। शक्कर डालें। इसे रोगी को पिलाकर सुला दें। रोगी सीधा या उलटा नहीं, बल्कि करवट लेकर सोए। यह एक खुराक है। ऐसी चार खुराकें। हर तीन घंटों बाद पीता रहे। इससे उल्टियाँ बंद हो जाएंगी। आराम मिलेगा।

शहद व लौंग

यदि कोई गर्भवती युवती बार-बार होने वाली उलटी से परेशान चल रही हो तो दो लौंग लें। इन्हें पीस लें। एक चम्मच शहद लें। इसमें यह पिसी लौंग मिलाएँ। चटाएँ। बार-बार की उल्टी आना बंद हो सकेगा।

धनिया का रस

उल्टियों रोकने के लिए हरा धनिया लें। इसको धोकर, रस निकालें। चार चम्मच रस रोगी को पिलाएं। उल्टी आना बंद होगा।

सूखा धनिया

सूखा धनिया पीस लें। इसे पानी में उबालें। अच्छी तरह उक्त जाने पर इसका रस पिलाएँ। उल्टी बंद होगी।

गर्भवती के लिए

1. ऊपर यताए धनिया के दोनों इलाज गर्भवती स्त्री के लिए भी उतने ही उपयोगी

हैं जितने अन्य उल्टी वाले रोगी के लिए।

2. गर्भवती बुबती को आने वाली उल्टियों या के का इलाज करने के लिए तीन

चम्मच चायल लें। इसे धोकर एक गिलास पानी में भिगो दें। 30 मिनट बाद

इन्हें हिला दें। इसमें एक छोटा चम्मच पिसा धनिया भी डाल दें। पंद्रह मिनट

तक मिगोए रखें। अब इन दोनों को पानी में अच्छी प्रकार मथ लें। छानें।

यह कै का इलाज है। इस एक गिलास पानी को तीन हिस्सों में पीना है।

हर बार डेढ़-डेढ़ घंटे का अंतरात रखें। कै नहीं होगी।

नारंगी का रस

उल्टियों लगें या के से गर्भवती परेशान हो। नारंगी का रत पिलाएँ। इससे उल्टी बंद हो जाती है। नारंगी खाने से भी यह रुक जाती है।

नींबू से उपचार

1. यदि उल्टी होने की प्रवृत्ति होने लगे। किसी का जी मिचालाने लगे। उसे नींबू

का एक टुकड़ा लेकर काली मिर्च, सेंधा नमक के साथ चूसना चाहिए। आराम

मिलेगा। उल्टी आएगी ही नहीं।

2. नींबू काटें। बीज निकालें। इसमें पिसी इसायची भरें। अब रोगी को चटाएँ।

उसको उल्टी आना बंद हो जाएगा।

3. यदि छोटा बच्चा दूध उलटता हो तो ऐसे बच्चे को पानी में कुछ बूंदें मिलाकर

पिला दें। बच्चा दूध उलटना छोड़ देगा।

4. नींबू काटकर बीज निकाल फेंके। अब इसमें काली मिर्च पिसी हुई तथा शक्कर

भरें। यदि रोगी इसे चाट ले तो उसकी उल्टी करने की प्रवृत्ति खत्म होगी।

5. नींबू का शर्बत बनाएँ। ठंडे पानी में शक्कर घोल लें। इसमें नींबू निचोड़ें।

इस एक गिलास शक्कर तथा नींदू मिले पानी को छान लें। रोगी को पिलाएँ।

जी खराब होना बंद होगा। जी मिचलाना बंद होगा। उल्टी आनी रुक जाएगी।

साँस भी सरल हो जाएगी।

6. उल्टी रोकने के लिए पोदीना पीस लें। रस निकालें। इस दो-तीन चम्मच रस

में आधा चम्मच नींबू का रस मिलाएँ। इसे पिलाने से उल्टी बंद हो जाएगी।

आँवले का मुरब्बा

यदि किसी युवती को के आती हो। किसी को उल्टी परेशान करती हो। इसे आँवले का मुरब्बा 30 ग्राम एक समय, हर दो घंटों बाद खिलाते रहें। आराम मिलेगा।


अम्लता का उपचार

जिसका पाचन ठीक नहीं होगा। गैस बनेगी। छाती में जलन होगी। खड़े डकार आएँगे। उसे अम्लता का सामना करना पड़ेगा। इस रोग को घरेलू उपचारों से ठीक करना संभव है। अधिक वायु बनना भी बंद हो जाएगा।

दूध का सेवन

अम्ल पित्त का रोगी यदि सबसे सरल व सुलभ उपचार चाहे तो उसे दिन में चार बार आधा-आधा गिलास ठंडा दूध पीना चाहिए। इससे आराम मिलेगा। अम्लता नहीं रहेगी। कई दिनों तक जारी रखें।

केला, इलायची, चीनी

इस रोग से बचने के लिए, छुटकारा पाने के लिए केला लें। इसको छीलकर टुकड़े करें। इस पर पिसी इलायची तथा पिसी चीनी डालें-आधा-आधा चम्मच। मिलाकर खाने से अम्लता को आराम मिलेगा।

गाजर का रस

इस रोग को शांत करने के लिए दिन में दो बार गाजर का रस-एक-एक गिलास रोगी पीता रहे। चार-पांच दिनों में पूरा आराम महसूस करेंगे।

गरम पानी व नींबू

अम्लता से परेशान व्यक्ति यदि एक गिलास गरम पानी में नींबू निचोड़कर, दिन में दो बार पीता है तो उसे काफी राहत मिलेगी। अम्लता की शिकायत नहीं रहेगी।

प्याज व दही

अम्लता का रोग ऐसा नहीं जो ठीक न से सके। ऊपर अनेक उपचार लिखे हैं। इनमें

एक यह भी है कि एक कटोरी दही में एक सफेद प्याज़ काटकर डालें। इसे खाएँ। यदि रोगी इसे दिन में दो बार, पाँच दिनों तक लगातार खाता है तो यह रोग पूरी तरह खत्म हो सकेगा।

नारियल का पानी

यदि अम्लता के रोगी को नारियल का पानी उपलब्ध हो सके तो उसे यह दिन में तीन बार पीते रहना चाहिए। चार ही दिनों में रोग खत्म होगा।

भुना हुआ आलू

ऐसा रोगी गरम राख में या गरम रेत में आलू भूनकर खाया करे। यह (1) अम्लता दूर करेगा। (2) उसे खड़े डकार आना बंद होगा। (3) उसके पेट में गैस नहीं बनेगी।

लॉग चबाना

अम्लता का प्रभाव पूरी तरह खत्म करने के लिए रोगी खाना खाकर एक लौंग चूसें, चयाएँ और धीरे-धीरे रस निगलता रहे। दिन में दो बार।

मूली का रस

खट्टी डकारें न आएँ। गैस बननी बंद हो। छाती में जलन न हो। ताज़ा मूली का एक कप रस निकालें। इसमें पिसी मित्री एक-डेढ़ चम्मच डालें। इसे रोगी को पिला दें। पाँच दिनों तक यह उपचार जारी रखें। अम्लता का रोग नहीं रहेगा।


जलोदर का उपचार

जलोदर रोग को भी घरेलू उपचारों के साथ टीक करना संभव है। ऐसे क्या उपचार हैं, उनका वर्णन यहाँ दिया है


लहसुन का रस


एक छोटा गिलास ताज़ा पानी लें। इसमें एक चम्मच लहसुन का रस डालें। मिलाएँ । रोगी को पिलाएँ। यदि इसे एक सप्ताह तक नियमित पिलाएँ तो रोग ठीक होगा।


चना का काढ़ा

एक गिलास पानी में एक मुही काले चने धोकर उथालें। खूब उबालें। जब पानी आया बच रहे तो उतारें। इसे रोगी को पिलाएँ। इसे कम-से-कम 25 दिनों तक रोगी को अवश्य पिलाया करें। उसका जलोदर का रोग खत्म होगा।

करेले का रस

करेले का रस चार चम्मय निकालें। इसे एक बड़े कप पानी में मिलाएं। पिलाएं। एक

सप्ताह तक यह उपचार जारी रखें। आराम मिलेगा। जलोदर खत्म होगा।

कच्चा प्याज़

जलोदर के रोगी को कच्चा प्याज़ डीलकर, काटकर, बार-बार खिलाएँ। कम-से-कम तीन बार, एक-एक प्याज एक दिन में। सात दिनों तक यह जारी रखें।

कुछ और फल-सब्ज़ियाँ

जलोदर के रोगी को ठीक करने के लिए उसे निम्नलिखित सब्जियों, फल, दही आदि खिलाएँ।

1. खरखूजा खिलाएँ। पफा, पीला, मीय खरबूजा ।

2. गाजर का सेवन।

3. गाजर का रस।

4. प्याज, गाजर, खरखूजा काटकर, मिलाकर एक साथ खिलाएँ।

5. इन तीनों को मिलाकर एक छोटा गिलास रस पिलाएँ।

6. एक गिलास छाछ, प्रातः नाश्ते में पिलाएँ।

इस उपचार को एक सप्ताह तक करने से जलोदर का रोगी पूरी तरह ठीक हो सकता है। इन पृष्ठों में हमने बमन (उल्टी) को रोने, अम्लता को समाप्त करने तथा जलोदर से छुटकारा पाने के तरीके जान लिये हैं। ये सभी हमारे हित में हैं। इनको प्रयोग में लाएँ।


आप सभी का धन्यावद Gk Ayurved