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शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2020

नकसीर, टॉन्सिल्स तथा नाभि टलना कैसे हों टीक?

 नकसीर, टॉन्सिल्स तथा नाभि टलना कैसे हों टीक?


नकसीर का उपचार

नकसीर का रोग हो जाने पर1. रोगी के नाक से खून बहता है। कभी कम तो कभी ज्यादा कभी कुछ बूंद ही तो कभी लगातार।

2. शरीर में अधिक गर्मी इसका कारण हो सकता है।

3. अधिक बुखार भी इसका कारण हो सकता है।

4. किसी किसी को नकसीर तो इसलिए निकलती है क्योंकि उसका खून पतला होता है। रुकता ही नहीं।

5. नकसीर फूटी हो या नकसीर आने के हालात बने हों तो रोगी को घूमने, फिरने,कहीं बाहर जाने से रोकें।

6. ऐसा रोगी तेज़ मसालों वाला भोजन न खाए। अधिक गरम आहार न ले।

तेज़ मिर्च भी उसके लिए ठीक नहीं।

7. ऐसा रोगी हंडा खाया करे। टंडा पीया करे। उसके खाद्य-पदार्य शीतल हो तोही अच्छा।

नकसीर को रोकने के लिए, इसकी प्रवृत्ति को खत्म करने के लिए, इसका उपचार

करने के लिए कापी घरेलू उपचार उपलब्ध हैं। यहाँ इनका वर्णन दे रहे हैं। रोगी या

अभिभावक अपनी सुविधानुसार उपचार चुन सकता है।

केला व दूध

यदि किसी को अक्सर नकसीर आने की शिकायत रहती हो तो दूध में शक्कर मिलाएँ।

केला खाकर इसे पी लें। काफी लाभ होगा। दो सप्ताह तक इसे लेते रहे। आराम हो

जाने पर भी कुछ दिन ज़रूर लें।

धनिया का रस

गर्मी के कारण नकसीर आने का उपचार करने के लिए हरा धनिया को पीसकर रस निकालें।

रोगी इस रस को सूंघता रहे। ऐसा दिन में कई बार करें। बड़ा आराम मिलेगा।

धनिया का लेप

हरा धनिया लें। इसे पीसकर पेस्ट-सा बनाएँ। इसे सिर पर लगाएँ। पेस्ट इतना ही पतला हो कि ठीक से लेप हो सके। यह नकसीर ठीक करेगा।

अंगूर का रस

नकसीर का रोगी घबराए नहीं। अंगूर के रस की 4-5 बूंदें निकालें। इसे नाक के दोनों नथुनों में उँडेलें। इससे नकसीर को आराम मिलेगा।

फिटकरी सूंघना

फिटकरी का एक छोटा टुकड़ा लें। इसे पीसें। इसे गाय के कच्चे दूध में घोल दें। इसे

सूंघने को दें। रोगी इसे बार-बार सूंघे। आराम मिलेगा।

फिटकरी की पट्टी

कुछ फिटकरी तोड़कर पानी में या गाय के दूध में भिगोएँ। इस पानी में साफ़ कपड़ा

डुबोकर रोगी के माथे पर ठंडी पट्टी करें। करते रहें। बार-बार निचोड़ें और लगाते रहें। बड़ा लाभ होगा।

प्याज़ का रस

नकसीर को शांत करने के लिए, प्याज़ का थोड़ा रस निकालें। कुछ ही बूंदें। इन्हें नाक के दोनों नधुनों में डालें। नकसीर को आराम मिलेगा।

आँवले से उपचार

1. नकसीर के रोगी को दिन में दो बार आँवले का मुरब्बा खाने को दें। इससे

यह शीतलता पाकर राहत महसूस करेगा।

2. सूखा आँवला लें। कूटें। रात को भिगोकर रखें। एक लीटर पानी में एक मुट्ठी

सूखे आंवले का पाउडर। प्रातः अच्छी प्रकार मथे। छानें। इस पानी से सिर

धोना है। ज़रूरत हो तो थोड़ा और भी पानी मिला लो। यह गर्मी को निकाल

फेंकेगा। आराम मिलेगा। कुछ दिनों तक यह सिर धोना जारी रखें। हर प्रातःही।

3. ताज़ा आँवलों का रस आधा चम्मच निकालें। इसकी दो-दो बूँद दोनों नथुनों

में टपकाएँ। आराम मिलेगा।

तुलसी का रस

नकसीर के रोगी को राहत पहुँचाने के लिए, नकसीर को रोकने के लिए ताज़ा तुलसी

के पत्तों का रस निकालें। इसकी बूंदें नाक में डालें। नकसीर रुक जाएगी।

अनार का रस

ताज़ा अनार के दानों से कुछ बूंदें रस की निकालें। इन्हें रोगी के नाक में डालें। नकसीर बंद होगी।

दोब का रस

नाक से बहने वाले रक्त को रोकने के लिए1. दोब का रस सूयें। नकसीर बंद होगी।

2. यदि बंद न हो तो 2-4 बूंद नाक में डालें। आराम मिलेगा।

इस प्रकार हम थोड़ा प्रयत्ल कर नकसीर को रोक सकते हैं तथा फिर से नकसीर

न आए, इसका प्रबंध कर सकते है।


टॉन्सिल का उपचार

यह गले का रोग है। टॉन्सिल तो सबके गले में होते ही हैं। यदि ये सामान्य रहें तो ठीक। यदि ये सूज जाएँ, उभर जाएँ, ऐसे में खाँसी, भोजन का निगल न पाना, दर्द महसूस करते रहना जैसी काफी तकलीफें हो जाती हैं। थोड़ी-सी कोशिश कर हम टॉन्सिल का इलाज

कर इन्हें ठीक रख सकते हैं। टॉन्सिल का पूरा नाम टॉन्सिलाइटिस है।

चाय का पानी

चाय को ज्यालें। छानें। इस पानी को सील गरम रहने पर गरारे करने से टॉन्सिल ठीक हो जाते हैं।

लहसुन से गरारे

लहसुन की 5 कलियों छीलें। छोटे टुकड़े करें। एक बड़े गिलास पानी में उबालें। छानें। गरारे करें। राहत मिलेगी।

ग्लिसरीन से गरारे

आधा गिलास गरम पानी लें। इसमें ग्लिसरीन डालें। छानें। गरारे करें। टॉन्सिलाइटिस को आराम मिलेगा।

फिटकरी और नमक

गरम पानी लें। इसमें पिसी फिटकरी, एक तिहाई चम्मच तथा अंदाज से नमक डालें।गरारे करें।

सिंघाड़ा का सेवन

टॉन्सिल्स का रोगी यदि सिंघाड़ा खाया करे तो उसको टॉन्सिल्स की तकलीफ़ नहीं रहेगी। ऐसा इसलिए होता है कि सिंघाड़ा में आयोडीन काफी होता है।

नमक वाला पानी

गरम पानी लें। इसमें आधा चम्मच नमक जालें। मिलाकर सुहाता तापमान होने पर गरारे करें। इस प्रकार गरारे करने से1. टॉन्सिल ठीक होंगे।

2. सूजन खत्म होगी।

3. गले में दर्द नहीं रहेगा।

गाजर का रस

टॉन्सिल रोगों के लिए गाजर का रस पीना बहुत उपयोगी रहता है। वह इसका सेवन प्रतिदिन किया करे।

अनन्नास का रस

ऐसा रोगी अनन्नास का रस पीया करे। अनन्नास को काटकर इसका सेवन भी करे उसे बड़ा आराम मिलेगा,


1. इस रोग को शांत करने के लिए तीन छोटे चम्मच सौंफ़ पीसें। गुड़ में मिलाएँ।

नाभि का टलना ठीक करने के लिए इसे खाना ठीक रहता है।

2. नाभि पर सरसों का तेल लगाने से आराम मिलेगा।

3. नाभि पर रुई का फोया तेल में भीगा लगाएँ। आराम मिलेगा।

नाभि टलना या अपनी जगह से हटना ठीक हो जाता है। इस अध्याय में नकसीर,

टॉन्सिल तथा नाभि टलना के उपचार बताए गए हैं। इनको उपयोग में ला सकते हैं।