Ayurveda Great Of Word

Ayurveda Best For Advice On Your Health

USE AYURVEDA AND TRETMENT SAVE YOU AND YOUR FAMILY

AYURVEDA AND FITTENES www.GkAyurved.Com

Get Glowing Skin And Body

Get glowing skin and healthy life every day Daily Visit

Benefits of daily yoga

Always get disease and get impeccable skin and healthy life

Faundder And ,CEO

शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2020

नकसीर, टॉन्सिल्स तथा नाभि टलना कैसे हों टीक?

 नकसीर, टॉन्सिल्स तथा नाभि टलना कैसे हों टीक?

नकसीर का उपचार



नकसीर का रोग हो जाने पर1. रोगी के नाक से खून बहता है। कभी कम तो कभी ज्यादा कभी कुछ बूंद ही तो कभी लगातार।

2. शरीर में अधिक गर्मी इसका कारण हो सकता है।

3. अधिक बुखार भी इसका कारण हो सकता है।

4. किसी किसी को नकसीर तो इसलिए निकलती है क्योंकि उसका खून पतला होता है। रुकता ही नहीं।

5. नकसीर फूटी हो या नकसीर आने के हालात बने हों तो रोगी को घूमने, फिरने,कहीं बाहर जाने से रोकें।

6. ऐसा रोगी तेज़ मसालों वाला भोजन न खाए। अधिक गरम आहार न ले।

तेज़ मिर्च भी उसके लिए ठीक नहीं।

7. ऐसा रोगी हंडा खाया करे। टंडा पीया करे। उसके खाद्य-पदार्य शीतल हो तोही अच्छा।

नकसीर को रोकने के लिए, इसकी प्रवृत्ति को खत्म करने के लिए, इसका उपचार

करने के लिए कापी घरेलू उपचार उपलब्ध हैं। यहाँ इनका वर्णन दे रहे हैं। रोगी या

अभिभावक अपनी सुविधानुसार उपचार चुन सकता है।

केला व दूध

यदि किसी को अक्सर नकसीर आने की शिकायत रहती हो तो दूध में शक्कर मिलाएँ।

केला खाकर इसे पी लें। काफी लाभ होगा। दो सप्ताह तक इसे लेते रहे। आराम हो

जाने पर भी कुछ दिन ज़रूर लें।

धनिया का रस

गर्मी के कारण नकसीर आने का उपचार करने के लिए हरा धनिया को पीसकर रस निकालें।

रोगी इस रस को सूंघता रहे। ऐसा दिन में कई बार करें। बड़ा आराम मिलेगा।

धनिया का लेप

हरा धनिया लें। इसे पीसकर पेस्ट-सा बनाएँ। इसे सिर पर लगाएँ। पेस्ट इतना ही पतला हो कि ठीक से लेप हो सके। यह नकसीर ठीक करेगा।

अंगूर का रस

नकसीर का रोगी घबराए नहीं। अंगूर के रस की 4-5 बूंदें निकालें। इसे नाक के दोनों नथुनों में उँडेलें। इससे नकसीर को आराम मिलेगा।

फिटकरी सूंघना

फिटकरी का एक छोटा टुकड़ा लें। इसे पीसें। इसे गाय के कच्चे दूध में घोल दें। इसे

सूंघने को दें। रोगी इसे बार-बार सूंघे। आराम मिलेगा।

फिटकरी की पट्टी

कुछ फिटकरी तोड़कर पानी में या गाय के दूध में भिगोएँ। इस पानी में साफ़ कपड़ा

डुबोकर रोगी के माथे पर ठंडी पट्टी करें। करते रहें। बार-बार निचोड़ें और लगाते रहें। बड़ा लाभ होगा।

प्याज़ का रस

नकसीर को शांत करने के लिए, प्याज़ का थोड़ा रस निकालें। कुछ ही बूंदें। इन्हें नाक के दोनों नधुनों में डालें। नकसीर को आराम मिलेगा।

आँवले से उपचार

1. नकसीर के रोगी को दिन में दो बार आँवले का मुरब्बा खाने को दें। इससे

यह शीतलता पाकर राहत महसूस करेगा।

2. सूखा आँवला लें। कूटें। रात को भिगोकर रखें। एक लीटर पानी में एक मुट्ठी

सूखे आंवले का पाउडर। प्रातः अच्छी प्रकार मथे। छानें। इस पानी से सिर

धोना है। ज़रूरत हो तो थोड़ा और भी पानी मिला लो। यह गर्मी को निकाल

फेंकेगा। आराम मिलेगा। कुछ दिनों तक यह सिर धोना जारी रखें। हर प्रातःही।

3. ताज़ा आँवलों का रस आधा चम्मच निकालें। इसकी दो-दो बूँद दोनों नथुनों

में टपकाएँ। आराम मिलेगा।

तुलसी का रस

नकसीर के रोगी को राहत पहुँचाने के लिए, नकसीर को रोकने के लिए ताज़ा तुलसी

के पत्तों का रस निकालें। इसकी बूंदें नाक में डालें। नकसीर रुक जाएगी।

अनार का रस

ताज़ा अनार के दानों से कुछ बूंदें रस की निकालें। इन्हें रोगी के नाक में डालें। नकसीर बंद होगी।

दोब का रस

नाक से बहने वाले रक्त को रोकने के लिए1. दोब का रस सूयें। नकसीर बंद होगी।

2. यदि बंद न हो तो 2-4 बूंद नाक में डालें। आराम मिलेगा।

इस प्रकार हम थोड़ा प्रयत्ल कर नकसीर को रोक सकते हैं तथा फिर से नकसीर

न आए, इसका प्रबंध कर सकते है।


टॉन्सिल का उपचार

यह गले का रोग है। टॉन्सिल तो सबके गले में होते ही हैं। यदि ये सामान्य रहें तो ठीक। यदि ये सूज जाएँ, उभर जाएँ, ऐसे में खाँसी, भोजन का निगल न पाना, दर्द महसूस करते रहना जैसी काफी तकलीफें हो जाती हैं। थोड़ी-सी कोशिश कर हम टॉन्सिल का इलाज

कर इन्हें ठीक रख सकते हैं। टॉन्सिल का पूरा नाम टॉन्सिलाइटिस है।

चाय का पानी

चाय को ज्यालें। छानें। इस पानी को सील गरम रहने पर गरारे करने से टॉन्सिल ठीक हो जाते हैं।

लहसुन से गरारे

लहसुन की 5 कलियों छीलें। छोटे टुकड़े करें। एक बड़े गिलास पानी में उबालें। छानें। गरारे करें। राहत मिलेगी।

ग्लिसरीन से गरारे

आधा गिलास गरम पानी लें। इसमें ग्लिसरीन डालें। छानें। गरारे करें। टॉन्सिलाइटिस को आराम मिलेगा।

फिटकरी और नमक

गरम पानी लें। इसमें पिसी फिटकरी, एक तिहाई चम्मच तथा अंदाज से नमक डालें।गरारे करें।

सिंघाड़ा का सेवन

टॉन्सिल्स का रोगी यदि सिंघाड़ा खाया करे तो उसको टॉन्सिल्स की तकलीफ़ नहीं रहेगी। ऐसा इसलिए होता है कि सिंघाड़ा में आयोडीन काफी होता है।

नमक वाला पानी

गरम पानी लें। इसमें आधा चम्मच नमक जालें। मिलाकर सुहाता तापमान होने पर गरारे करें। इस प्रकार गरारे करने से1. टॉन्सिल ठीक होंगे।

2. सूजन खत्म होगी।

3. गले में दर्द नहीं रहेगा।

गाजर का रस

टॉन्सिल रोगों के लिए गाजर का रस पीना बहुत उपयोगी रहता है। वह इसका सेवन प्रतिदिन किया करे।

अनन्नास का रस

ऐसा रोगी अनन्नास का रस पीया करे। अनन्नास को काटकर इसका सेवन भी करे उसे बड़ा आराम मिलेगा,

1. इस रोग को शांत करने के लिए तीन छोटे चम्मच सौंफ़ पीसें। गुड़ में मिलाएँ।

नाभि का टलना ठीक करने के लिए इसे खाना ठीक रहता है।

2. नाभि पर सरसों का तेल लगाने से आराम मिलेगा।

3. नाभि पर रुई का फोया तेल में भीगा लगाएँ। आराम मिलेगा।

नाभि टलना या अपनी जगह से हटना ठीक हो जाता है। इस अध्याय में नकसीर,

टॉन्सिल तथा नाभि टलना के उपचार बताए गए हैं। इनको उपयोग में ला सकते हैं।


धन्यवाद Gk Ayurved


गुरुवार, 22 अक्तूबर 2020

सरल, घरेलू उपचारों से करें पेट-दर्द को दूर

 सरल, घरेलू उपचारों से करें पेट-दर्द को दूर

पेट को ठीक रखने का अर्थ है शरीर को टीक रखना। पेट को ठीक रखने का अर्थ है पूर्ण स्वस्थ होना। पेट-दर्द रहेगा तो कार्य करना कठिन होगा। अपना दायित्व निभाना मुश्किल होगा। कई बार तो यह दर्द असहनीय हो जाता है। आदमी तड़प-तड़पकर समय कारता है। उसे बड़ी कठिनाई होती है। न ठीक प्रकार से बैठ-उठ सकते हैं और न ही सो सकते हैं। पेट-दर्द को घरेलू उपचारों से ठीक करने के कुछ नुस्खे यहाँ प्रस्तुत हैं




मूली का रस

पेट-दर्द को शांत करने के लिए मूली का रस लें। एक कप रस लेकर, उचित मात्रा में

पिसी काली मिर्च तथा नमक डालें। इससे पेट-दर्द ठीक हो जाएगा।

छाछ पीना।

यदि पेट-दर्द का कारण भूख रही हो तो एकदम खाना खाने से यह ठीक नहीं होगी।

पेट इसे स्वीकार करने में कठिनाई महसूस करेगा। ऐसे में एक गिलास ठाठ, नमक, कालीमिर्च या भुना हुआ जीरा डालकर पी लें। पेट-दर्द ठीक हो जाएगा।

धनिया का शर्बत

पेट-दर्द से यदि पीड़ित रहते हों तो पानी दो कप लें। इसमें दो छोटे चम्मच धनिया पिसा हुआ या मोटा कुटा हुआ डालें। उबालें । खूब उबालने पर यदि पानी की मात्रा मात्र एक कप रह जाए तो इसे रोगी पी ले। पेट-दर्द नहीं रहेगी।

पिसी हुई सोंठ

पेट-दर्द के लिए पिसी सोंठ आराम देती है।

1. एक गिलास गरम पानी लें। गुनगुना गरम । छोटा चम्मच आधा भरकर पिसी

सोंठ लें। दो चुटकी पिसा सेंधा नमक लें। इसे पानी के गिलास में मिलाकर

पी लें। पेट-दर्द नहीं रहेगा। पाचन-शक्ति बढ़ेगी। शौच भी सामान्य आएगा।

2. हथेली पर एक चौथाई चम्मच पिसी सोंठ, एक चुटकी सेंधा नमक पिसा हुआ

और काले चने के बराबर हींग का टुकड़ा रखें। इसे फाँके। एक कप गरम

पानी लेकर पी लें। यह पेट में युलते ही अपना प्रभाव शुरू कर, पेट-दर्द को

ठीक कर देगा।

अनार के दाने

पके हुए अनार को आधा लें। इसके दाने निकालें। इन दोनों पर पिसी काली मिर्च तथा नमक डालें। मिलाकर चम्मच के साथ खाएँ। पेट-दर्द तो ठीक होगी ही, शरीर में शक्ति भी आएगी।

राई का लेप

पाँच चम्मच राई लें। इसे पानी में पीसें। पेट पर एक पतला साफ़ कपड़ा चौड़ी पट्टी जैसा-विछाएँ । उस पर इस पिसी राई से लेप करें। 15-20 मिनट यह कपड़ा बिछा रहने दें। फिर हटाएँ। पेट-दर्द ठीक हो जाएगा।

नींबू से उपचार

पेट-दर्द को ठीक करने के लिए1. एक नींबू काटकर, आधा भाग लें। इससे बीज निकालें। एक-एक चुटकी पिसी काली मिर्च, काला नमक और सेंका हुआ जीरा लें। तीनों को मिलाएँ। नींबूको इस मिलाए गए चूर्ण के साथ चाटते रहें। यह आराम देगा।

2. दो चम्मच नींबू का रस, एक चम्मच अदरक का रस और एक चम्मच शहद

मिलाएँ। तीनों को मिलाकर पी जाएँ। इससे पेट-दर्द एकदम शांत हो जाएगा।

जीरा और शहद

पिसा जीरा दो चुटकी लें। एक चम्मच शहद में मिलाएँ। मिलाकर चाटने से पेट-दर्द

को आराम मिलता है।

पुदीना का जत

पेट-दर्द के छुटकारा पाने के लिए पुदीने का चूर्ण या हरा पुदीना पिसा हुआ एक चम्मच में। इसे एक गिलास पानी में डालें। पिसी काली मिर्च, पिसा जीरा, कूटी हुई हींग, थोड़ा नमक, सभी अंदाज़ से इस प्रकार लें कि एक छोटी चम्मच की मात्रा हो जाए। इसे भी पुदीना मिले पानी में डालें । घोलें। रोगी को पिला दें। पेट-दर्द पूरी तरह चला जाएगा। आराम महसूस करेंगे।

अमरूद की पत्तियों

पेट-दर्द के रोग को शांत करने के लिए अमरूद के पेड़ ते 7 कोमल पत्तियों तोड़ें। धोएँ। पानी के साथ पीसें। इसे पानी के एक कप में मिलाकर पी लें। आराम मिलेगा।

अजवाइन तया नमक

एक चम्मच अजवाइन तथा अंदाज़ से नमक-दोनों को मिलाकर फांक लें। ऊपर से एक कप गरम पानी पी जाएँ। आराम मिलेगा। पेट-दर्द ठीक होगा।

शहद से इलाज

1.जिसे पेट-दर्द हो, वह एक चम्मच शहद खाकर ऊपर से पानी पी लें। धीरे-धीरे

दर्द गायव होगा।

2. योहा गुनगुना पानी करें। एक कप की मात्रा । इसमें एक चम्मच शहद मिलाएँ।

घोलकर पी जाएँ।

9. जिसकी पाचन-शक्ति गड़बड़ा गई हो। भोजन ठीक से न पचता हो। अक्सर

थोड़ा या अधिक पेट-दर्द रहता हो। ऐसा व्यक्ति 21 दिनों तक दिन में दो

वार, एक-एक चम्मच शहद खाया करे। उसका पाचन सुधरेगा। पेट दर्द की

शिकायत नहीं हुआ करेगी।

लहसुन तथा लहसुन का रस

1. यदि अपने भोजन में नियमित थोड़ा लहसुन लेते रहें तो पेट दर्द की शिकायत

नहीं हुआ करती।

2. प्रातः दो कलियाँ लहसुन की लें। छीतें। मुँह में डालकर कुछ चबाएँ। जब

अधिक तीखा लगने लगे तो ऊपर से पानी पी लें। यह दर्द नहीं होने देगा।

हो रही हो तो आराम दिलाएगा।

3. यदि पेट-दर्द हो रहा हो और इसे तुरंत शांत करना हो तो तीन चम्मच लहसुन

का रस निकालें। इसमें चुटकी भर नमक मिलाएँ। रोगी को पिला दें। पेट-दर्द

ठीक होगा।

हींग का काढे

यदि पेट-दर्द का कारण पेट में वायु रुकना हो तो एक सफ़ेद चना के समान हींग का

लें। इसे एक बड़े गिलास पानी में डालें। उबालें। खूब उबलकर जब पानी थीथाई

गिलास रह जाए तो रोगी इसे धीरे-धीरे पी ले। हवा निष्कासित होगी। पेट का दर्द भी नहीं रहेगा।

हींग का लेप

1. यदि पेट-दर्द बना रहता हो तो थोड़ी हींग लेकर इसे पीसकर पेस्ट-सा बनाएँ।

इसे नाभि पर लेप की भौति लगा दें। यह आराम करेगा।

2. साथ ही, चने की दाल के बराबर शुद्ध हींग लेकर ऊपर से एक कप गुनगुना

पानी पिलाएँ। रोगी का पेट-दर्द ठीक हो जाएगा। बच्चों से लेकर बड़ों तक, किसी-न-किसी कारण से पेट दर्द रह सकता है। यहाँ

वे सभी घरेलू उपचार बताए हैं जो घरों में उपलब्ध रहते हैं। इनको ध्यान से पढ़ें। मन में बिठाएँ। जब भी आवश्यकता पड़े इन्हें उपयोग में लाएँ। डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ेगा।


धन्यवाद Gk Ayurved


मंगलवार, 20 अक्तूबर 2020

कब्ज़' देता है अनेक रोगों को जन्म, इससे बचें!

  'कब्ज़' देता है अनेक रोगों को जन्म, इससे बचें!

 
यदि कब्ज हो जाए तो इसे अकेला मत समझें। यह अनेक रोगों को जन्म देकर, हमारे स्वास्थ्य को बिगाड़ देता है। केवल का ही हमारे अनेक रोगों के लिए जिम्मेवार है। अतः कब्ज़ दूर करने के लिए पेट को साफ़ रखना ज़करी है। पेट साफ़ रखना बड़ा कठिन नहीं। थोड़ी सावधानी, थोड़ी सतर्कता, थोड़ी चुस्ती हो तो यह रोग भी नहीं होता। हो जाए तो भगाना भी कठिन नहीं। हमारे घर में, रसोई में, अनेक, फल, सब्जियाँ, अनाज,मसाले आदि उपलब्ध रहते हैं जिनकी मदद से कब्ज़ रोग को हटाया जा सकता है। इसको ठीक किया जा सकता है अथवा इसको होने से भी रोका जा सकता है।

 कब्ज़ कैसे होता है?

निम्नलिखित कारणों से भी कब्ज़ हो सकता है1. रात को देर तक जागते रहने से कब्ज़ हो जाने की संभावना बनी रहती है।
बेआरामी जो हो जाती है।
2. रात को देर तक जागते रहने से शरीर में खुश्की हो जाना आम बात है।
यह रुखापन, यह खुश्की कब्ज का कारण बन सकती है।
3. कुछ लोग अक्सर रूखे-सूखे पदार्थ खाते हैं। इससे शरीर के अंदर, अंतड़ियों
में खुश्की हो जाती है। यह खुश्की भी कब्ज़ का कारण बनती है।
4. जिन्हें दिन-भर कम पानी पीने की आदत रहती है। पानी की मात्रा 8-10
गिलास न होने की बजाय काफ़ी कम रह जाती है। इससे कब्ज़ हो जाना
आम बात है।
5. कब्ज का इलाज समय पर करें। वरना यह अनेक रोगों को जन्म तो देती
ही है, इससे बनने वाली गैस सीधी दिमाग को चढ़ जाती है।
यहाँ हम कुछ उपचारों का वर्णन कर रहे हैं जो कब्ज़ को ठीक करने में उपयोगी रह सकते हैं।
बेल से कब्ज़ हटाना
हमारी आँतों में मल रुक जाता है। सूख जाता है। अवरुद्धता पैदा कर देता है। इसके लिए पका हुआ बेल लें। इसका गूदा निकालें। मसलें । इसको पानी में अच्छी प्रकार मसलकर, इसका शर्बत तैयार करें। यह शर्बत पीने से कब्ज नहीं रहता।
मूली से इलाज
कब्ज़ को पूरी तरह ख़त्म करने तथा फिर से सिर न उठा सकने की अवस्था में लाने
के लिए मूली खाएँ। आराम मिलेगा। यदि मूली को नमक तथा बारीक पिसी काली मिर्च के साथ खाएँ तो आराम मिलता है। इसे कुछ समय तक निरंतर खाएँ ताकि कब जड़ से ही उखड़ा रहे।
प्याज़
कुछ लोग प्याज़ से घृणा करते हैं। इसकी गंध को भी अच्छा नहीं मानते। मगर प्याज को देखें। अन्य लाभों के साथ कब्ज़ जैसे रोगों को भी यह खत्म कर सकता है। प्रतिदिन एक कच्चा प्याज़ खाते रहें तो कब्ज ठीक होगा।
टमाटर
टमाटर अनेक औषधीय गुणों का पनी है। इसके इन्हीं गुणों में से एक है पेट में विद्यमान आँतों को साफ़ रखना। आँतें साफ़ रहेंगी तो कब्ज होगा ही नहीं। हम यदि स्वस्थ रहना चाहते हैं तो अपनी आमाशय आँतों को पूरी तरह साफ़ रखें। बाहर से बैठे-बैठे यह काम तो हो नहीं सकता। इस काम को टमाटर का सेवन आसान कर देता है। जिसे कब्ज रहता हो, उसे तो टमाटर अवश्य खाना चाहिए।
नीम के फूल
यदि हम नीम के फूल सुखाकर घर में रखें। इनको पीसकर, चूर्ण बनाकर रखने से, जब जरूरत हो, फायदा ले सकते हैं। एक चौथाई छोटा चम्मच इस चूर्ण का खाएँ। ऊपर से गरम पानी पी लें। पानी गुनगुना ही गरम हो। रात सोते वक्त इस खुराक को लें तो और भी अच्छा। प्रातः पेट साफ़ हो जाएगा।
हरड़ का मुरब्बा
रात को सोने से पूर्व एक हरड़ का मुख्या खाएँ। ऊपर से दूध का गिलास पी लें। प्रातः
जय शौच जाएँगे तो पेट साफ़ हो जाएगा। कब्ज का नामोनिशान नहीं रहेगा।
छुआरों से इलाज
का हो तो इसे हटाने के लिए छुआरे भी खा सकते हैं। यह कब्ज दूर करता है।
1. प्रातः उठने पर दो छुआरे पानी में भिगोएँ । दिन-भर पानी में रहने दें या इन्हें
तोड़कर भिगोएँ। रात को इन्हें चबा-चबाकर खाएँ। फिर भोजन करें। पेट साफ़
करेंगे।
2. कब्ज को हटाने की इच्छा से रात को दो छुआरे दूध में उबालें। इस दूध को
पीकर सो जाएँ। यह कब्ज दूर कर देगा।
3. यदि कब्ज़ काफी ज्यादा हो तो प्रातः तवा रात को तीन-तीन अथवा दो-दो
छुआरे गरम पानी से खा लें। आराम मिलेगा।
नींबू से उपचार
कब्ज दूर करने के लिए नींबू से निम्नलिखित उपचार कर सकते हैं1. रात को पानी के एक छोटे गिलास में नींबू निचोड़कर ज़रूरत अनुसार शक्कर
डालें। मिलाएँ। इसे सोने से पूर्व तैयार करें तथा पी लें।
कुछ दिन, इसे रात के वक्त नियमित लें। पुराना-से-पुराना कब्ज दूर हो जाएगा।
2. कल के रोगी के लिए नींबू का सेवन बहुत लाभकर रहता है। वह भोजन
के बाद नींबू मिला पानी पीता रहे तो भी कब्ज की शिकायत नहीं रहती।
नारंगी
कप को हटाने के लिए, मल को अपने आप निकलने योग्य बनाने के लिए, जोर लगाकर शौच न करना पड़े इस अवस्था में पहुंचने के लिए नारंगी का रस बड़ा फायदा करता है। नाता में एक गिलास नारंगी का रस कुछ दिनों तक नियमित पीते रहें। इससे
मल आसानी से आने लगेगा।
तरबूज का सेवन
कप के रोगी तो नियमित तरबूट खाया करें। जब-जब उपलब्ध रहे, इसका एक गिलास रस पी लें। इससे कम घटता जाएगा। धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगा।
बथुआ का साग
बथुआ के साग में दस्त लाने की क्षमता होती है। अतः कब्ज़ को दूर भी करेगा। रोगी को चाहिए कि कुछ समय तक नियमित यथुआ का साग खाए और कब्ज़ को पूरी तरहvभगाए।
करेला
कब्ज़ का रोगी1. जब-जब करेला मिले इसकी सब्जी का सेवन करे। यह पेट साफ़ रखने में मदद करेगा।
2. करेले का रस निकालकर एक कप कुछ दिन पिया करे। यह पुराने- से-पुराने
कब्ज़ को भी दूर कर देगा।
हींग
हिंग्वष्टक चूर्ण, छोटी हरड़ का चूर्ण तथा मीठा सोडा, तीनों की समान मात्रा लें। मिलाएँ। इसको छोटा आधा चम्मच खा लें। ऊपर से ताज़ा पानी पी लें। यह खुराक एक जैसी दिन में दो बार लें। इसके सेवन से कब्ज नहीं रहेगा। कुछ दिन लें। पूरा लाभ मिलेगा।
पानी
प्रातः उठकर दो गिलास पानी नियमित लेने से भी कब्ज़ जाता रहता है। यह अपनी आदत ही बना लें कि प्रातः दो गिलास पानी पीना है। यह अनेक अन्य रोगों को भी शांत कर देगा।
नमक
कब्ज दूर करने के लिए सेंधा नमक मदद करता है। एक गिलास पानी लें। इसमें आधा चम्मच सेंधा पिसा हुआ नमक डालें। नींबू निचोड़ें। मिलाकर पी जाएँ। इसे प्रातः खाली पेट पीना शुरू करें। कुछ ही दिनों में कब्ज़ पूरी तरह हट जाएगा।


आँवला
1. आँवला भी हमें अनेक प्रकार से राहत पहुंचाता है। कब्ज़ को हटाने में भी
मददगार होता है। आँवले का चूर्ण घर में होना चाहिए। एक छोटा चम्मच
इस चूर्ण को खाएँ तथा पानी पी लें। आराम मिलेगा। सामान्य रूप से शौच
उतरने लगेगा। एक सप्ताह लेते रहें।
2. सूखे आँवलो का मोटा चूरा, एक चम्मच मात्र एक गिलास पानी में भिगोएँ।
इसे रात-भर भीगा रहने दें। प्रातः इन भीगे हुए आँवलों को इसी पानी में
मथ लें। अच्छी तरह ताकि पूरा असर पानी में आ जाए। इसे छान लें। पी
लें। यह कब्ज दूर करने में सक्षम होगा। कुछ दिन उपचार करें।
अदरक
1. कब्ज से पीड़ित रोगी एक अदरक का टुकड़ा लें। इसे साफ़ कर, छील कर
पतली-पतली फाँके बना लें। इन फाँकों को गुड़ के साथ चबाएँ व निगलते
जाएँ। यह कब्ज़ को दूर कर शौच को सामान्य रूप से उतारने में मदद करेगी।
2. कब्ज की शिकायत ही न हो, इसके लिए रसोई में अदरक सदा हो। इसे दाल,
सब्ज़ी आदि में छौंक लगाकर ज़रूर खाया करें। रोग ही पैदा नहीं होगा।
लहसुन
1. लहसुन कब्ज़ का दुश्मन है। यदि हम लहसुन को अपनी दाल-सब्ज़ी के छौंक
में स्थान देते हैं तो इससे कब्ज़ नहीं होगा।
2. एक कप पानी लें। इसमें दो तुरियाँ लहसुन की डालकर उबालें। जय यह
पानी केवल दो तीन चम्मच रह जाए तो इसे गुनगुनी अवस्था में पी लें। कुछ
दिन नियमित पान करने से कब्ज़ पूरी तरह हट सकेगा।
पपीता
कब्ज के रोगी के लिए पपीते का सेवन बढ़िया रहता है। यह कब्ज़ हटाने में सक्षम है।
जब-जद पपीता मिले अवश्य सेवन करें और कब्ज़ से छुटकारा पाएँ।
हम जान गए हैं कि कब्ज़  को जड़ से उखाड़ना जरूरी है। इससे छुटकारा पाने
के अनेक तरीके हैं। इनमें से कोई अपना लें।


धन्यवाद Gk Ayurved



सोमवार, 19 अक्तूबर 2020

दोनों प्रकार की 'बवासीर' का संभव है घर में उपचार

 दोनों प्रकार की 'बवासीर' का संभव है घर में उपचार


बवासीर का रोग पेट तथा मलद्वार से संबंधित है। बवासीर में खून भी गिर सकता है, नहीं भी। इसीलिए बिना खून वाली बवासीर तथा खून वाली बवासीर-दो किस्में हैं इसकी। दोनों खराब हैं। बेचैनी, बेआरामी, कमज़ोरी लाती हैं। अतः दोनों खतरनाक हैं। इनकाइ लाज प्रारंभिक स्टेज पर हो तो बहुत अच्छा। इस रोग को बढ़ने न दें वरना शरीर की क्षति होती जाएगी।

वैसे बवासीर को कहीं-कहीं तीन प्रकार का बताया गया है। उनके मुताबिक(1) बाह्य बवासीर, (2) आंतरिक बवासीर, (3) मिश्रित।

शिराओं के अंदर रक्त जम जाना, शिराओं का फूल जाना ही बवासीर का मस्साब ना देता है। यह रोग है। तीनों में ऐसा ही होता है।

रोग को अन्य दो तरीकों से भी आवंटित किया जाता है। इसके अनुसार

(1) तीक्ष्ण, (2) दीर्घकाल तक रहने वाली। तीक्ष्ण प्रभावकारी बवासीर में शौच के बाद बहुत सारा खून बहता रहता है। ऐसा अक्सर होते रहने से बेहद कमज़ोरी आ जाती है।

यदि ऐसा हो तो रक्तअल्पता का रोग हो जाता है। दीर्घकाल तक रहने वाली बवासीर में शौच के बाद रक्त कभी-कभी ही आता है। हमेशा नहीं। मगर मस्सों से बेहद तकलीफ हुआ करती है। यह इतनी कमज़ोरी तो नहीं लाती मगर परेशान करती है हम यहाँ पर रक्त वाली यवासीर तथा बिना रक्त के बवासीर कहकर इनके घरेलू उपचारों की चर्चा करेंगे।

रक्त वाली बवासीर

कुछ उपचार यहाँ प्रस्तुत हैं। दाना मेवी से इलाज

1. दाना मेथी लें। इसे पीसें। एक गिलास दूध लें। उसमें एक चम्मच पिसी दाना मेथी डालें। दूध उबालें। इसे छानकर पी लें। बवासीर का रक्त बहना बंद हो जाएगा।

2. पिसी मेथी एक चम्मच लें। एक गिलास पानी में इसे डालें। उबालें। जय पानी मात्र एक तिहाई रह जाए। इसे छानकर पीने से पूरा आराम मिलेगा।

मूली का र

1. कच्ची मूली का रस निकालें । मात्रा आधा छोटा गिलास । देशी घी पिपला हुआ

एक चम्मच लें। इसे मूली के रस में मिलाएं। रोगी को पिलाएँ । उसे एसी

खुराक शाम को भी पीनी है। जब तक ठीक न हो, लेते रहें।

2. कच्ची मूरी खाते रहें। यह अच्छा व आसान इलाज है। बवासीर के साथ रक्त

बहना बंद होगा।

भुने हुए चने

यदि भुने हुए चने हों तो इनका खाना खूनी बवासीर में फायदा करता है। भुने हुए थने गरम ही खाने चाहिए। यह खूनी बवासीर का सरल इलाज है। इससे शरीर में शक्ति काभी  संचार होता है।

ईसबगोल की भूसी

1. रात को सोते समय गरम दूध लें। इसमें शक्कर बालें। एक चम्मच ईसबगोल

की भूसी डालें। मिलाकर पी लें। रक्तस्त्रावी बवासीर ठीक होगी।

2. यदि कभी दूध उपलव्य न हो तो गरम पानी के साथ भी ईसबगोल की भूसी ले सकते हैं।

नींबू और कत्था

एक नींबू लें। इसे काटें। बीज निकालें। इन आधे-आधे नींबुओं में पिसा हुआ कत्या भरें। नींबू को चूसें। जब तक रस रहे, चूसते रहें। रोग शांत होता जाएगा।

करेला व शक्कर

ताज़ा करेला लें। इसका रस निकालें। इसमें ज़रूरत अनुसार शक्कर मिलाएँ। रोगी को पिलाएँ। आराम महसूस करेगा। बवासीर ठीक होगी। मस्सों से खून आना बंद होजा एगा।

नारियल की राख

एक नारियल लें। इसकी जटाएँ उतारें। इन्हें जलाएँ। ठडी होने पर पीस लें कपड़छान करें। यह राख रक्तस्रावी बवासीर की दवा है। इस राख का एक चममच तथा इतनीही शक्कर लें। मिलाएं। रोगी को खिलाएँ। ऊपर से ताज़ा पानी पिला दें रोग शांत होजाएगा।

मसूर तथा खट्टी छाछ

इस रोग को उखाड़ने के लिए भोजन में कोई अन्य दाल, सब्णी न खाएँ। यल्कि मसूरकी दाल बनाएँ व खाएँ । खाना खाने के बाद एक गिलास खड़ी छाछ पिया करें। कुछदिनों तक इसे नियमित करें।

फिटकरी का घोल

फिटकरी लें। पीसें। पानी में घोलें

1. इस घोल से रोगी अपनी गुदा धोया करे। आराम मिलता है।

2. साथ ही, इस फिटकरी के पानी को पिचकारी में भरें। गुदा के अंदर डालें।पिचकारी से यह पानी अंदर जाने दें। आराम मिलेगा।

तिल का तेल

1. मल-द्वार पर तिल का तेल लगाया करें। इससे आराम मिलेगा।

2. चार चम्मच काले तिल लें। इन्हें चबा-चबाकर खाएँ। इन्हें खाने के बाद एक

कटोरी दही खाएं। इससे बवासीर में खून गिरना रुक जाएगा। राहत महसूस

करेंगे।

कच्चा प्याज़

इस रोग को ठीक करने के लिए एक कव्या प्याज़ रोज़ खाया करें। रक्तवावी यवासीर ठीक होगी।

पका पपीता

इस रोग का रोगी यदि अच्छा पका पपीता प्रतिदिन, दिन में दो बार, एक समय अढ़ाई सौ  ग्राम खाया करे तो बहुत आराम मिलेगा।

बिना खून वाली बवासीर

ऐसी बवासीर जिसमें खून नहीं गिरता अधिक खतरनाक होती है क्योंकि इसके मस्से अधिक परेशान करते हैं। इस रोग का घरेलू उपचार भी संभव है। कुछ उपचारों को यहाँ दिया जा रहा है।

कच्चा प्याज

यदि इस रोग का रोगी प्रतिदिन एक प्याज़, एक समय या दोनों समय खाना शुरू करदे तो इससे उसे काफी आराम मिलेगा।


आम, दही, अदरक आदि

भीठे आमों का रस एक कप लें। मीठा दही एक छोटी कटोरी, अदरक का ताजा रस एक चम्मच लें। इन सबको मिलाएँ। रोगी को पिला दें। हर 6 घंटों बाद, दिन में तीन बार सेवन करें। कुछ दिनों तक इसे नियमित लें। बवासीर ठीक हो जाएगी।

लौकी के पत्ते

लोकी के पत्ते लें। धोएँ। पीसें। इसका लेप गुदा पर करें। दिन में दो बार। यह इस रोग को ठीक कर देगा। जारी रखें।

अमरूद का सेवन

बिना रक्त वाली बवासीर का रोगी सदा अमरूद खाया करे। अच्छे, इलाहाबादी अमरूद मिलें तो जी भरकर खाएँ व आराम पाएँ।

गेहूँ का पौधा

इस रोग का इलाज करने के लिए गेहूँ के पौधे लाएँ। इनका रस निकालें। इसे रोगी को पिलाएँ। एक समय में एक कप। आराम मिलना शुरू होगा।

तिलों का तेल

बिना रक्त वाली बवासीर का इलाज करने के लिए-तिलों के तेल को प्रयोग में लाएँ।

1. काले तिलों के तेल को गुदा पर अच्छी प्रकार लगाते रहें। यह आराम देगा।

2. दो बड़े चम्मच काले तिल लें। इन्हें चबा-चबाकर खाएँ। बाद में ताजा पानी पीएं। कई दिनों इस उपचार को करते रहें। लाभ मिलेगा।

गवार के पौधे

गवार के पौधे तोड़कर लाएँ। इन्हें धोकर साफ़ करें। रस निकालें। पानी डालकर पी लें यदि आप गवार के 10 पत्ते लें तो 10 हो काली मिर्च भी लें। दोनों को पीसें। एक कप पानी में मिलाएँ। पी लें। आराम मिलेगा।

मूली व घी

मूली काटें। इन टुकड़ों को देसी घी में तलें। रोगी को खिलाएँ। यह बिना खून वाली बवासीर को ठीक करेगा।

मूली व ओस

सफेद मूली लें। साफ़ करें। छोटे टुकड़े बनाएँ। इस पर नमक स्वादानुसार डालें। इसे थाली में डालकर ओस में रखें। सुबह बिना कुछ और खाए, इस कटी, ओस व नमक बाली मूली को खाएँ।


धन्यवाद Gk Ayurved





धनिया हरा हो या सूखा,स्वस्थ रहने के लिए इसका सेवन है ज़रूरी

    धनिया हरा हो या सूखा,स्वस्थ रहने के लिए इसका सेवन है ज़रूरी


      धनिया की खुशबू विशेष होती है। इसको सूंघते ही व्यक्ति भोजन की ओर आकर्षित हो उठता है। भोजन को ढंग से परोसा जाए और दाल-सब्जी पर बारीक कटा हरा धनिया डाला जाए तो यह सुगंध तो देता ही है, आँखों को भी सुहावना लगता है। सूखे धनिया से लगाया गया तह का हमारे लिए भोजन को रुचिकर बना देता है।

      1. धनिया हरा हो या सूखे दाने, दोनों का भोजन को स्वादिष्ट बनाने में विशेष महत्व है।
      2. जहाँ यह भोजन में सुगंध तथा रुचि पैदा करता है, वहीं यह अपने औषधीय
      गुणों के कारण, घर में, वैध और हकीमों द्वारा सराहा जाता है। इसमें गुण
      अनेक हैं। अतः यह केवल सुगंधित मसाला ही नहीं, औषधीय गुणों के कारण अनेक रोगों को भी ठीक करने में सक्षम है।
      3. धनिया की तासीर ठंडी होती है। यह भी एक गुण है। गर्मी को शांत करने, गर्मी के कारण उपजे रोगों को दूर करने वाला है।
      4. सिर दर्द हो और यह गर्मी के कारण हो तो हरे धनिया के पत्तों को पीसकर ललाट पर लगाएँ। आराम मिलता है। 
      चक्कर आते रहना
      ऐसी अवस्था में सूखा धनिया तथा सूखा औंवला लें। दोनों की बराबर-बराबर मात्रा। इन्हें अलग-अलग कूटकर मिला दें। बड़ा बारीक करने की ज़रूरत नहीं। इसका एक बड़ा चम्मच रात को पानी में भिगोएँ। रात-भर पड़ा रहने दें। प्रातः अच्छी प्रकार साफ हाथ से मिलाएँ। फिर छानें। यह रोगी पी ले। उसको चक्कर आने की शिकायत नहीं रहेगी। यदि इस प्रकार न पी सकें तो इसमें बारीक पीसी हुई मित्री डालकर, घोलकर, पी सकते हैं फायदा होगा।
      स्वप्नदोष के बाद
      यदि किसी को स्वप्न दोष बहुत हुए हों और वह बहुत तंग हो तो उसे रात को एक बड़ा चम्मच पीसा हुआ सूखा धनिया भिगोकर रखना चाहिए। पानी एक गिलास ठीक रहेगा। प्रातः इसे छानकर पीने से स्वप्नदोषों के कारण आई दुर्बलता ठीक हो जाएगी।
      सरसाम के रोगी के लिए
      सरसाम के रोगी का उपचार करने के लिए हरे धनिया का रस एक चौथाई कटोरी निकालें। ककड़ी का पानी भी इतनी मात्रा में निकाले। दोनों में एक चम्मच सिरका डालें। अब इसको एक इक्कन वाली, घोड़ी चौड़ी शीशी में डालें। इसे सूयें। रोगी इसे बार-बार सूंघकर सरसाम रोग से ठीक हो सकता है।


      पेशाब में जलन रहना
      यदि किसी को पेशाब करते समय काफ़ी जतन रहे, तथा पेशाय भी थोड़ा-थोड़ा या रुक-रुककर निकले तो एक छोटा चम्मच धनिया का भरकर लें (पिसा व छना हुआ ।) एक कप बकरी का दूध लें। उसमें इस धनिया के चूर्ण को डालें। डेढ़ चम्मच पिसी मिश्री भी डालें। यह पेशाब की जलन को पूरी तरह दूर करेगा। कुछ दिनों तक दिन में दो बार नियमित लें।
      गंजों का इलाज
      जिनके सिर पर बाल नहीं रहते। गंजापन आ जाता है। वे भी फिर से बाल उगा सकते हैं। ताज़ा हरा धनिया लें। इसे पीसें। इससे सिर पर लेप करें। दिन में दो बार। कुछ दिनों तक जारी रखें। आप देखेंगे कि नए बाल निकलने शुरू हो जाएंगे।
      नकसीर होने पर
      गर्मी के मौसम में घर से बाहर भी जाना पड़ता है। काम भी करना पड़ता है। गर्मी लग जाने की संभावना बढ़ जाती है। यदि ताजा पत्तों का रस निकालकर रोगी को सुंधाएँ तो आराम मिलता है। नकसीर बंद हो जाती है।
      बवासीर के रोग में
      धनिया के बीज लें। इन्हें काटकर, छिलका निकाल दें। तव पिसी मिश्री में मिलाएँ। रोगी इसे खाएं। इससे बवासीर के रोगी को आराम आने लगेगा। जब तक पूरा लाभ न हो। जारी रखें।
      उल्टियों में
      यदि लगातार उल्टियाँ रहें तो भी धनिया काम आता है। धनिया के ताज़ा पत्ते लें। इसका रस निकालें। हर पौन घंटे बाद थोड़ा-थोड़ा रस पिलाते रहें। इससे उल्टियों की शिकायत सूत्म होगी।
      मैदे का उपचार
      मैदे में अनेक विकार आ जाते हैं। मेदा कमजोर हो जाता है। इसके लिए भी धनिया से लाभ उठाया जा सकता है। प्रतिदिन भोजन के बाद, दोनों समय आधा तोला पनिया बबाएँ। यह पेदे को शक्ति देगा। दस्तों की शिकायत खत्म होगी।
      भोजन में रुचि पैदा करना
      यदि भोजन खाने को मन न करे। अक्सर टलना शुरू हो जाए। रुचि न रहे तो धनिया, छोटी इलायची, काली मिर्च को बराबर-बराबर मात्रा में लें। इन्हें पीसें। संभालकर रखें। इस पूर्ण की एक छोटी आधी चम्मच लें। इससे अरुचि की शिकायत खत्म होगी। भूख लगेगी। भोजन खाने की इच्छा जागृत होगी।
      मासिक धर्म अधिक आना
      1. यदि किसी महिला को मासिक धर्म अधिक आने लगे तो उसको तुरंत इलाज करना चाहिए। माहवारी में अधिक रक्त का गिरना ठीक नहीं। एक बड़ा गिलास पानी लें। उसमें दो बड़े चम्मच धनिया डालें। उबालें। जब पानी एक घोचाई गिलास शेष रह जाए तो इसे उतारें। छार्ने । मिश्री मिलाकर रोगी को पिला दे इससे उसे काफी लाभ होगा।
      2. अधिक रक्त न गिरे, इसलिए एक चम्मच पिसा हुआ धनिया, एक चम्मच बरा लोड और एक चम्मच देशी घी, तीनों को लेकर मिलाएँ। रोगी को खाने को दें काफी लाभ होगा। अधिक मात्रा में रक्त आना बंद होगा।
      मंदाग्नि व यकृत
      यदि मंदाग्नि को ठीक करना हो। पाचन-शक्ति को बढ़ाना हो या फिर यकृत में कोई विकार आ जाए, ऐसे में घर में चूर्ण तैयार करें। इसके लिए सोंठ, धनिया तथा काला नमक लें। सोंठ दो भाग, धनिया पाँच भाग तथा काला नमक एक भाग। इन सब को कूटकर, छानकर रखें। इसकी एक छोटी चम्मच, पानी के साथ, दिन में तीन खुराक खाएँ। भूख खुलकर लगेगी। यकृत शक्ति पाएगी। भोजन आसानी से पचेगा।
      तिल तथा मस्सों को हटाना
      यदि तिल तयो मस्से हों तो हरा धनिया पीसकर इन पर लगाना शुरू करें। दिन में दो बार। ये धीरे-धीरे मिटते जाएंगे। चेहरा साफ हो जाएगा।
      गैस बनना
      सूखा पनिया एक बड़ा चम्मच एक गिलास पानी में उबालें। छानें। इसके तीन भाग कर, दिन में पी लें। गैस बननी बंद होगी।
      दमा-खाँसी-श्वास रोग
      यदि श्वास की कोई भी तकलीफ हो तो धनिया तथा मिश्री पीसकर चावलों के पानी में डालकर पिलाएँ। लाभ होगा।
      नींद कम आना
      हरा धनिया पीसें। चीनी मिलाएँ। इसे पानी में डालकर पीने से अनिद्रा रोग खत्म होता है। अच्छी नींद आती है। इस प्रकार हम हर घर में मिलने वाले धनिया का लाभ उठा सकते हैं।


            धन्यवाद Gk Ayurved