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सोमवार, 19 अक्तूबर 2020

धनिया हरा हो या सूखा,स्वस्थ रहने के लिए इसका सेवन है ज़रूरी

    धनिया हरा हो या सूखा,स्वस्थ रहने के लिए इसका सेवन है ज़रूरी


      धनिया की खुशबू विशेष होती है। इसको सूंघते ही व्यक्ति भोजन की ओर आकर्षित हो उठता है। भोजन को ढंग से परोसा जाए और दाल-सब्जी पर बारीक कटा हरा धनिया डाला जाए तो यह सुगंध तो देता ही है, आँखों को भी सुहावना लगता है। सूखे धनिया से लगाया गया तह का हमारे लिए भोजन को रुचिकर बना देता है।

      1. धनिया हरा हो या सूखे दाने, दोनों का भोजन को स्वादिष्ट बनाने में विशेष महत्व है।
      2. जहाँ यह भोजन में सुगंध तथा रुचि पैदा करता है, वहीं यह अपने औषधीय
      गुणों के कारण, घर में, वैध और हकीमों द्वारा सराहा जाता है। इसमें गुण
      अनेक हैं। अतः यह केवल सुगंधित मसाला ही नहीं, औषधीय गुणों के कारण अनेक रोगों को भी ठीक करने में सक्षम है।
      3. धनिया की तासीर ठंडी होती है। यह भी एक गुण है। गर्मी को शांत करने, गर्मी के कारण उपजे रोगों को दूर करने वाला है।
      4. सिर दर्द हो और यह गर्मी के कारण हो तो हरे धनिया के पत्तों को पीसकर ललाट पर लगाएँ। आराम मिलता है। 
      चक्कर आते रहना
      ऐसी अवस्था में सूखा धनिया तथा सूखा औंवला लें। दोनों की बराबर-बराबर मात्रा। इन्हें अलग-अलग कूटकर मिला दें। बड़ा बारीक करने की ज़रूरत नहीं। इसका एक बड़ा चम्मच रात को पानी में भिगोएँ। रात-भर पड़ा रहने दें। प्रातः अच्छी प्रकार साफ हाथ से मिलाएँ। फिर छानें। यह रोगी पी ले। उसको चक्कर आने की शिकायत नहीं रहेगी। यदि इस प्रकार न पी सकें तो इसमें बारीक पीसी हुई मित्री डालकर, घोलकर, पी सकते हैं फायदा होगा।
      स्वप्नदोष के बाद
      यदि किसी को स्वप्न दोष बहुत हुए हों और वह बहुत तंग हो तो उसे रात को एक बड़ा चम्मच पीसा हुआ सूखा धनिया भिगोकर रखना चाहिए। पानी एक गिलास ठीक रहेगा। प्रातः इसे छानकर पीने से स्वप्नदोषों के कारण आई दुर्बलता ठीक हो जाएगी।
      सरसाम के रोगी के लिए
      सरसाम के रोगी का उपचार करने के लिए हरे धनिया का रस एक चौथाई कटोरी निकालें। ककड़ी का पानी भी इतनी मात्रा में निकाले। दोनों में एक चम्मच सिरका डालें। अब इसको एक इक्कन वाली, घोड़ी चौड़ी शीशी में डालें। इसे सूयें। रोगी इसे बार-बार सूंघकर सरसाम रोग से ठीक हो सकता है।

      पेशाब में जलन रहना
      यदि किसी को पेशाब करते समय काफ़ी जतन रहे, तथा पेशाय भी थोड़ा-थोड़ा या रुक-रुककर निकले तो एक छोटा चम्मच धनिया का भरकर लें (पिसा व छना हुआ ।) एक कप बकरी का दूध लें। उसमें इस धनिया के चूर्ण को डालें। डेढ़ चम्मच पिसी मिश्री भी डालें। यह पेशाब की जलन को पूरी तरह दूर करेगा। कुछ दिनों तक दिन में दो बार नियमित लें।
      गंजों का इलाज
      जिनके सिर पर बाल नहीं रहते। गंजापन आ जाता है। वे भी फिर से बाल उगा सकते हैं। ताज़ा हरा धनिया लें। इसे पीसें। इससे सिर पर लेप करें। दिन में दो बार। कुछ दिनों तक जारी रखें। आप देखेंगे कि नए बाल निकलने शुरू हो जाएंगे।
      नकसीर होने पर
      गर्मी के मौसम में घर से बाहर भी जाना पड़ता है। काम भी करना पड़ता है। गर्मी लग जाने की संभावना बढ़ जाती है। यदि ताजा पत्तों का रस निकालकर रोगी को सुंधाएँ तो आराम मिलता है। नकसीर बंद हो जाती है।
      बवासीर के रोग में
      धनिया के बीज लें। इन्हें काटकर, छिलका निकाल दें। तव पिसी मिश्री में मिलाएँ। रोगी इसे खाएं। इससे बवासीर के रोगी को आराम आने लगेगा। जब तक पूरा लाभ न हो। जारी रखें।
      उल्टियों में
      यदि लगातार उल्टियाँ रहें तो भी धनिया काम आता है। धनिया के ताज़ा पत्ते लें। इसका रस निकालें। हर पौन घंटे बाद थोड़ा-थोड़ा रस पिलाते रहें। इससे उल्टियों की शिकायत सूत्म होगी।
      मैदे का उपचार
      मैदे में अनेक विकार आ जाते हैं। मेदा कमजोर हो जाता है। इसके लिए भी धनिया से लाभ उठाया जा सकता है। प्रतिदिन भोजन के बाद, दोनों समय आधा तोला पनिया बबाएँ। यह पेदे को शक्ति देगा। दस्तों की शिकायत खत्म होगी।
      भोजन में रुचि पैदा करना
      यदि भोजन खाने को मन न करे। अक्सर टलना शुरू हो जाए। रुचि न रहे तो धनिया, छोटी इलायची, काली मिर्च को बराबर-बराबर मात्रा में लें। इन्हें पीसें। संभालकर रखें। इस पूर्ण की एक छोटी आधी चम्मच लें। इससे अरुचि की शिकायत खत्म होगी। भूख लगेगी। भोजन खाने की इच्छा जागृत होगी।
      मासिक धर्म अधिक आना
      1. यदि किसी महिला को मासिक धर्म अधिक आने लगे तो उसको तुरंत इलाज करना चाहिए। माहवारी में अधिक रक्त का गिरना ठीक नहीं। एक बड़ा गिलास पानी लें। उसमें दो बड़े चम्मच धनिया डालें। उबालें। जब पानी एक घोचाई गिलास शेष रह जाए तो इसे उतारें। छार्ने । मिश्री मिलाकर रोगी को पिला दे इससे उसे काफी लाभ होगा।
      2. अधिक रक्त न गिरे, इसलिए एक चम्मच पिसा हुआ धनिया, एक चम्मच बरा लोड और एक चम्मच देशी घी, तीनों को लेकर मिलाएँ। रोगी को खाने को दें काफी लाभ होगा। अधिक मात्रा में रक्त आना बंद होगा।
      मंदाग्नि व यकृत
      यदि मंदाग्नि को ठीक करना हो। पाचन-शक्ति को बढ़ाना हो या फिर यकृत में कोई विकार आ जाए, ऐसे में घर में चूर्ण तैयार करें। इसके लिए सोंठ, धनिया तथा काला नमक लें। सोंठ दो भाग, धनिया पाँच भाग तथा काला नमक एक भाग। इन सब को कूटकर, छानकर रखें। इसकी एक छोटी चम्मच, पानी के साथ, दिन में तीन खुराक खाएँ। भूख खुलकर लगेगी। यकृत शक्ति पाएगी। भोजन आसानी से पचेगा।
      तिल तथा मस्सों को हटाना
      यदि तिल तयो मस्से हों तो हरा धनिया पीसकर इन पर लगाना शुरू करें। दिन में दो बार। ये धीरे-धीरे मिटते जाएंगे। चेहरा साफ हो जाएगा।
      गैस बनना
      सूखा पनिया एक बड़ा चम्मच एक गिलास पानी में उबालें। छानें। इसके तीन भाग कर, दिन में पी लें। गैस बननी बंद होगी।
      दमा-खाँसी-श्वास रोग
      यदि श्वास की कोई भी तकलीफ हो तो धनिया तथा मिश्री पीसकर चावलों के पानी में डालकर पिलाएँ। लाभ होगा।
      नींद कम आना
      हरा धनिया पीसें। चीनी मिलाएँ। इसे पानी में डालकर पीने से अनिद्रा रोग खत्म होता है। अच्छी नींद आती है। इस प्रकार हम हर घर में मिलने वाले धनिया का लाभ उठा सकते हैं।